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मद्रास HC के जज के खिलाफ प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, तमिलनाडु के मुख्य सचिव और DGP से 2 हफ्ते में मांगा जवाब

Written by:Banshika Sharma
Published:
सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के एक जज के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों पर गंभीर रुख अपनाया है। एक मंदिर में दीप जलाने की अनुमति देने वाले फैसले के बाद जज को निशाना बनाया गया था। शीर्ष अदालत ने तमिलनाडु सरकार के शीर्ष अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
मद्रास HC के जज के खिलाफ प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, तमिलनाडु के मुख्य सचिव और DGP से 2 हफ्ते में मांगा जवाब

तमिलनाडु में मद्रास हाईकोर्ट के एक जज के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों पर सुप्रीम कोर्ट ने गहरी चिंता जताते हुए सख्त रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने इस मामले में तमिलनाडु के मुख्य सचिव, गृह सचिव, DGP और चेन्नई पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी कर दो हफ्तों में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पी बी वराले की बेंच ने इस मामले को न्याय व्यवस्था के लिए चिंताजनक बताया। कोर्ट ने कहा कि किसी जज को उसके फैसले के लिए व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाना स्वीकार्य नहीं है। यह मामला एक वकील और बीजेपी नेता जी एस मणि की याचिका पर सुनवाई के लिए आया था।

क्या है पूरा विवाद?

यह विवाद मद्रास हाईकोर्ट के जज जस्टिस जी आर स्वामीनाथन के एक फैसले से शुरू हुआ। उन्होंने मदुरै स्थित थिरुपरंकुंद्रम पहाड़ी के प्राचीन मुरुगन मंदिर में पारंपरिक ‘कार्थीगई दीपम’ उत्सव के तहत दीप जलाने की अनुमति दी थी।

श्रद्धालु तमिल कार्तिक महीने की पूर्णिमा पर यह उत्सव मनाना चाहते थे, लेकिन राज्य सरकार ने सुरक्षा का हवाला देते हुए इसकी इजाजत नहीं दी थी। सरकार का तर्क था कि दीप स्तंभ से कुछ दूरी पर एक मस्जिद स्थित है, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है। जस्टिस स्वामीनाथन ने श्रद्धालुओं के पक्ष में फैसला सुनाया था।

जज को बनाया गया निशाना

हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद कुछ संगठनों और राजनीतिक दलों ने जज के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिए। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इन प्रदर्शनों में जस्टिस स्वामीनाथन को व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाया गया। उनके खिलाफ जाति और धर्म के आधार पर भड़काऊ और आपत्तिजनक नारे लगाए गए। इसके अलावा, सोशल मीडिया पर भी उनके खिलाफ मानहानि करने वाली टिप्पणियां की गईं।

याचिका में की गई कार्रवाई की मांग

तमिलनाडु के वकील जी एस मणि ने अपनी याचिका में कहा कि इन गतिविधियों से न केवल न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंची है, बल्कि सार्वजनिक व्यवस्था पर भी असर पड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से ऐसे प्रदर्शनों पर तत्काल रोक लगाने और जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तमिलनाडु सरकार के वकील को तलब किया और राज्य के शीर्ष अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है। अदालत ने कहा कि अधिकारियों की रिपोर्ट मिलने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा।