
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के बजाय व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया। यह आदेश 2023 के पशु जन्म नियंत्रण नियमों के अनुपालन में विफलता और आवारा कुत्तों की समस्या पर कार्रवाई न करने के लिए दिया गया। कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की वर्चुअल उपस्थिति की मांग को खारिज करते हुए कहा कि अधिकारी कोर्ट के आदेशों पर सोते रहते हैं और कोई कार्रवाई नहीं करते।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने कहा, “वे शारीरिक रूप से आएं और बताएं कि अनुपालन शपथ-पत्र क्यों नहीं दाखिल किए गए।” कोर्ट ने बिहार के मुख्य सचिव को चुनाव के बहाने छूट देने से भी इनकार किया और कहा कि चुनाव आयोग सब संभाल लेगा। तेलंगाना और पश्चिम बंगाल को छोड़कर सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को 3 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने को कहा गया है।
अनुपालन रिपोर्ट न देने पर नाराजगी
कोर्ट ने अगस्त में दिए गए तीन महीने के समय के बावजूद अधिकांश राज्यों द्वारा अनुपालन रिपोर्ट न देने पर नाराजगी जताई। न्यायमूर्ति नाथ ने कहा कि लगातार कुत्ते काटने की घटनाएं हो रही हैं, जिससे देश अंतरराष्ट्रीय मंच पर बदनाम हो रहा है। कोर्ट ने पूछा कि क्या राज्य अधिकारी अखबार या सोशल मीडिया नहीं देखते?
सार्वजनिक सुरक्षा और पशु कल्याण के बीच संतुलन
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट स्वतः संज्ञान लेते हुए सार्वजनिक सुरक्षा और पशु कल्याण के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। कोर्ट ने 22 अगस्त को दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में कुत्तों की सामूहिक पकड़ और बिना रिहाई के आदेश को संशोधित किया था। अब कुत्तों को पकड़कर बधियाकरण, टीकाकरण के बाद उसी इलाके में छोड़ने का निर्देश है। हर वार्ड में चारा स्थल बनाने और सड़कों पर खिलाने पर रोक लगाई गई है।
