नेताजी सुभाष चंद्र बोस को “राष्ट्र पुत्र” घोषित करने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार, CJI बोले “अदालत में एंट्री बैन कर देंगे”

अदालत ने कहा कि बार-बार समान याचिकाएं दाखिल करना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है। इसी के साथ याचिकाकर्ता को चेतावनी दी कि यदि भविष्य में ऐसी याचिकाएं दोबारा दायर की गईं तो उनकी याचिकाओं पर विचार नहीं किया जाएगा।
Supreme Court

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सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने एक याचिकाकर्ता को जमकर फटकार लगाई। सोमवार को इस याचिका पर उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उन्होंने बार-बार एक जैसी याचिकाएं दाखिल कीं तो उनकी सुप्रीम कोर्ट में एंट्री बंद कर दी जाएगी।

मामला नेताजी सुभाष चंद्र बोस को “राष्ट्र पुत्र” घोषित करने और आज़ाद हिंद फौज (INA) की भूमिका को स्वतंत्रता संग्राम का प्रमुख आधार मानने की मांग से जुड़ा है। याचिका में मांग की गई थी कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस को आधिकारिक रूप से “राष्ट्र पुत्र” घोषित किया जाए। इसके साथ ही नेताजी के जन्मदिन और आईएनए स्थापना दिवस को राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाने की भी मांग की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को दी कड़ी चेतावनी

सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान उस समय सख्त टिप्पणी देखने को मिली, जब अदालत ने बार-बार समान प्रकृति की याचिकाएं दाखिल करने पर नाराजगी जताई और याचिकाकर्ता को कड़ी चेतावनी दी। यह मामला न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष पिनाकपानी मोहंते द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। याचिका में नेताजी सुभाष चंद्र बोस को औपचारिक रूप से “राष्ट्र पुत्र” घोषित करने, आज़ाद हिंद फौज के सशस्त्र संघर्ष को स्वतंत्रता आंदोलन का प्रमुख आधार माननेलऔर 23 जनवरी नेताजी का जन्मदिन व और 21 अक्टूबर (INA स्थापना दिवस) को राष्ट्रीय दिवस घोषित करने जैसी मांगें शामिल थी। इसके अलावा याचिका में 1947 में भारत की आज़ादी से जुड़ी परिस्थितियों पर एक आधिकारिक रिपोर्ट जारी करने का निर्देश देने की भी मांग की गई थी।

कहा “कोर्ट में एंट्री बंद कर देंगे”

सुनवाई के दौरान सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश को जब यह पता चला कि याचिकाकर्ता पिनाकपानी मोहंते ने पहले भी ऐसी ही मिलती-जुलती याचिकाएं दाखिल की थीं, जिन्हें कोर्ट पहले ही खारिज कर चुका है तो उन्होंने गुस्से में कहा “आपका मकसद सिर्फ प्रचार पाना लगता है। हम रजिस्ट्री को निर्देश दे रहे हैं कि भविष्य में आपकी कोई भी PIL स्वीकार न की जाए।” सीजेआई ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए चेतावनी दी कि “सुप्रीम कोर्ट में आपकी एंट्री अब बंद कर देंगे”। अदालत ने इस मामले पर कड़ी नाराजगी जताई और कहा कि बार-बार समान याचिकाएं दाखिल करना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है। जब याचिकाकर्ता ने दलील दी कि “इस बार मामला अलग है” तो अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया और याचिका पर आगे सुनवाई से इनकार कर दिया।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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