डिजिटल अरेस्ट स्कैम पर सुप्रीम कोर्ट ने RBI और बैंकों को दिया सख्त निर्देश, बड़े ट्रांजैक्शन रोकने और ग्राहकों को अलर्ट करने के तरीके बनाने को कहा

देश में बढ़ते 'डिजिटल अरेस्ट' फ्रॉड पर गहरी चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बैंकों और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को कड़े निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने कहा कि ग्राहकों को ठगी से बचाने के लिए बैंकों को बड़े और संदिग्ध ट्रांजैक्शन रोकने के लिए तत्काल एक मजबूत तंत्र विकसित करना होगा।
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नई दिल्ली: भारत में तेजी से फैल रहे ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे साइबर फ्रॉड के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। सोमवार को एक सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने बैंकों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि ग्राहकों को धोखाधड़ी वाले बड़े ट्रांजैक्शन से बचाने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाए जाएं।

अदालत केंद्र सरकार द्वारा दायर एक स्टेटस रिपोर्ट की समीक्षा कर रही थी, जिसमें डिजिटल अरेस्ट से जुड़े बढ़ते साइबर अपराधों का ब्योरा दिया गया था। कोर्ट इस बात की जांच कर रहा है कि गृह मंत्रालय, RBI और दूरसंचार प्राधिकरणों के बीच समन्वय को कैसे बेहतर बनाया जाए ताकि विदेशों से ऑपरेट कर रहे साइबर सिंडिकेट पर लगाम लगाई जा सके।

बैंकों की जवाबदेही तय, बनाने होंगे नए सिस्टम

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अब यह बैंकों की जिम्मेदारी होगी कि वे ऐसे तरीके बनाएं जिससे ग्राहकों को किसी भी संदिग्ध गतिविधि के बारे में तुरंत अलर्ट किया जा सके। अदालत ने कहा कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे स्कैम में जब पीड़ित से बड़ी रकम ट्रांसफर कराई जाती है, तो उसे रोकने के लिए बैंकों के पास एक ऑटोमेटेड मैकेनिज्म होना चाहिए।

इसके अलावा, कोर्ट ने कई महत्वपूर्ण निर्देश भी जारी किए:

  • SOP का कार्यान्वयन: केंद्रीय गृह मंत्रालय को 2 जनवरी 2026 से एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) लागू करने का निर्देश दिया गया है, ताकि विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके।
  • नियमों की अधिसूचना: इस संबंध में नियमों को अगले 2 सप्ताह के भीतर अधिसूचित किया जाना चाहिए।
  • समझौता ज्ञापन: संबंधित विभागों के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) का मसौदा 4 सप्ताह के भीतर तैयार करने को कहा गया है।

‘बैंक बोझ बनते जा रहे हैं’- CJI की तल्ख टिप्पणी

सुनवाई के दौरान CJI की अध्यक्षता वाली बेंच ने बैंकों के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि कई मामलों में बैंक अधिकारी खुद आरोपियों से मिले होते हैं, जो बेहद चिंताजनक है।

“ये बैंक बोझ बनते जा रहे हैं। बैंकों को यह समझना चाहिए कि वे जनता के धन के संरक्षक हैं और उन्हें इस भरोसे को नहीं तोड़ना चाहिए। समस्या यह है कि ये बैंक इन धोखेबाजों को ऋण देते हैं और फिर NCLAT आदि में कार्रवाई करते हैं।”- सुप्रीम कोर्ट

अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने जब केंद्र की रिपोर्ट पेश की, तो अदालत ने वरिष्ठ नागरिकों के साथ हो रही ठगी पर विशेष चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने एक रिटायर्ड दंपत्ति का उदाहरण दिया जिनकी जीवन भर की जमा-पूंजी साइबर फ्रॉड में लुट गई। यह मामला दिखाता है कि कैसे आम नागरिक, विशेषकर वरिष्ठ नागरिक, इन शातिर ठगों का आसानी से शिकार बन रहे हैं। अदालत का यह निर्देश इन साइबर अपराधियों पर नकेल कसने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

Shyam Dwivedi
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7 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव.

पत्रकार वह व्यक्ति होता है जो समाचार, घटनाओं, और मुद्दों की जानकारी देता है, उनकी जांच करता है, और उन्हें विभिन्न माध्यमों जैसे अखबार, टीवी, रेडियो, या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रस्तुत करता है। मेरा नाम श्याम बिहारी द्विवेदी है और मैं पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। View all posts by Shyam Dwivedi →
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