बंगाल में हुआ सत्ता परिवर्तन अब पूरी तरह से आकार लेता नजर आ रहा है। भाजपा सरकार के गठन के 22 दिन बाद अब शुभेंदु अधिकारी आज अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करते नजर आए। एक एक कर कैबिनेट और राज्य मंत्रियों ने शपथ ग्रहण की।
9 मई को शुभेंदु ने बंगाल के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली थी। तब से ही इस बात की चर्चा हो रही है कि वो अपने मंत्रिमंडल में किन चेहरों को जगह देने वाले हैं। अब इस बात का सस्पेंस खत्म हो चुका है। चलिए जान लेते हैं कौन कौन से मंत्रियों ने शपथ ग्रहण की है।
शुभेंदु मंत्रिमंडल का विस्तार
शुभेंदु कैबिनेट का पहला विस्तार शुरू हो चुका है। लोक भवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में 22 राज्य मंत्री और 13 कैबिनेट मंत्री शपथ ले रहे हैं-
कैबिनेट मंत्री के तौर पर बीजेपी विधायक दीपक बर्मन, मनोज कुमार, तपस रॉय, मनोज उरांव गौरी शंकर घोष, शंकर घोष
स्वपन दास गुप्ता, कल्याण चक्रवर्ती, अजय कुमार पोद्दार, जगन्नाथ चट्टोपाध्याय, शरद्वत मुखर्जी, दूध कुमार मंडल, अनूप कुमार दास ने कैबिनेट मंत्री के तौर पर शपथ ली।
जोएल मुर्मू, हरे कृष्णा बेरा, आनंदमय बर्मन, अशोक डिंडा, नदियार चंद बाउरी, विशाल, लामा, शांतनु प्रामाणिक, उमेश रे, मौमिता विश्वास मिश्रा, पूर्णिमा चक्रवर्ती, भास्कर भट्टाचार्य, कौशिक चौधरी, दिबाकर घरामी, अमिया कुक्कू, कलिता माझी, बिराज विश्वास, गार्गी दास घोष, दीपंकर जना, कलिता माझी, सुमना सरकार को राज्य मंत्री की शपथ दिलाई गई।
इनके अलावा मालती राव रॉय, राजेश महतो और डॉ इंद्रनील खान को राज्य मंत्री का स्वतंत्र प्रभार सौंपा गया है।
मुख्यमंत्री ने दी थी जानकारी
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने रविवार को सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर एक पोस्ट शेयर करते हुए अपने नवगठित राज्य मंत्रिमंडल के सोमवार को होने वाले शपथ ग्रहण समारोह की जानकारी दी थी और बताया था कि राज्यपाल आरएन रवि इन मंत्रियों को शपथ दिलाने वाले हैं।
मुख्यमंत्री ने लिखा “सोमवार सुबह 11 बजे पश्चिम बंगाल के लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई राष्ट्रवादी राज्य सरकार की कैबिनेट लोक भवन में शपथ ग्रहण करेगी। पश्चिम बंगाल के 35 मंत्री अपने पद की शपथ लेंगे, जो उन्हें महामहिम माननीय राज्यपाल आर एन रवि दिलाएंगे। हम पश्चिम बंगाल की जनता के आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।”
15 साल बाद तृणमूल कांग्रेस हुई बाहर
बता दें कि पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 294 सदस्य विधानसभा में 207 सीट जीतने के बाद स्पष्ट बहुमत से तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के शासन के अंत किया। टीएमसी केवल 80 सीटों पर स्मार्ट कर रह गई। 2011 में सत्ता में आने के बाद यह तृणमूल कांग्रेस का सबसे खराब प्रदर्शन कहा जा रहा है।






