
केंद्र सरकार ने रक्षा खरीद प्रक्रिया में व्यापक सुधारों की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य सैन्य आधुनिकीकरण में देरी को खत्म करना और आपातकालीन खरीद को तेज करना है। नए नियमों के तहत आपातकालीन रक्षा अनुबंधों को 12 महीने के भीतर पूरा करना अनिवार्य होगा, अन्यथा अनुबंध रद्द कर दिया जाएगा। इस कदम से तेजस लड़ाकू जेट के इंजन और अन्य हथियारों व गोला-बारूद की आपूर्ति में तेजी आएगी।
रक्षा सचिव ने बताया कि खरीद चक्र को 69 सप्ताह तक कम किया गया है, जिससे रक्षा सौदों के समय पर पूरा होने में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। पारंपरिक प्रक्रिया में कई स्तर शामिल होते थे, जैसे वेंडरों से सूचना मांगना, सेवा गुणवत्ता आवश्यकताएं तय करना, रक्षा खरीद परिषद की मंजूरी और तकनीकी व क्षेत्रीय परीक्षण। नए सुधारों से सशस्त्र बलों को उभरती सुरक्षा चुनौतियों का तेजी से जवाब देने की क्षमता मिलेगी।
एक विशेष पैनल भी गठित
सरकार ने रक्षा खरीद प्रक्रिया (डीएपी)-2020 को और सुव्यवस्थित करने के लिए महानिदेशक की अध्यक्षता में एक विशेष पैनल भी गठित किया है। यह पैनल खरीद के वर्गीकरण, व्यापार सुगमता, परीक्षण प्रक्रियाओं, अनुबंध प्रबंधन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी नई तकनीकों के एकीकरण की समीक्षा करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ये सुधार न केवल नौकरशाही को कम करेंगे, बल्कि रक्षा सौदों में पारदर्शिता भी बढ़ाएंगे।
आपातकालीन खरीद शक्तियों का उपयोग
ये सुधार भारत की रक्षा तैयारियों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। गलवान घाटी संघर्ष (2020), बालाकोट हवाई हमले (2019) और उरी सर्जिकल स्ट्राइक (2016) के बाद आपातकालीन खरीद शक्तियों का उपयोग किया गया था। अब सरकार का लक्ष्य वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के बीच आधुनिक तकनीकों और हथियार प्रणालियों को बिना देरी के शामिल करना है।
