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पृथ्वी की इकलौती जगह, जहां आज तक नहीं पहुंच पाया कोई! आवाजें दूर तक कंपा देती है रूह

Written by:Sanjucta Pandit
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इस स्थान के बारे में यदि आप गूगल पर सर्च करना चाहते हैं, तो आपको Oceanic Pole of Inaccessibility सर्च करना पड़ेगा, जिससे आपको यहां के बारे में पूरी जानकारी डिटेल्स में मिल जाएगी।
पृथ्वी की इकलौती जगह, जहां आज तक नहीं पहुंच पाया कोई! आवाजें दूर तक कंपा देती है रूह

पृथ्वी पर एक से बढ़कर एक अनोखी और रहस्यमई चीजे हैं। इसके बारे में जानने और समझना के लिए लोग हमेशा एक शौक रहते हैं। आज हम आपको धरती पर मौजूद एक ऐसी जगह के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां 99% लोग पहुंच नहीं सकते हैं और यह पृथ्वी की इकलौती ऐसी जगह है, जहां पर कोई पहुंच नहीं पाता है। हालांकि, लोगों का ऐसा कहना होता है कि कोई भी काम मुश्किल जरूर हो सकता है, लेकिन नामुमकिन नहीं। हालांकि, पृथ्वी पर मौजूद इस स्थान पर यह कहावत किसी काम की नहीं रह जाती।

यह पढ़ कर आपको हैरानी जरूर होगी, लेकिन यह बिल्कुल सच है कि पृथ्वी पर ऐसा स्थान भी है, जहां किसी भी तरह से पहुंचा नहीं जा सकता है। इस जगह को पॉइंट नेम (Point Nemo) नाम से जाना जाता है, क्योंकि यह कैप्टन Nemo से प्रेरित है। इसे Earth’s Loneliest Place भी कहा जाता है।

प्रशांत महासागर में है स्थित

यह पृथ्वी का सबसे अलग स्थान है, जो कि प्रशांत महासागर के बीचो-बीच स्थित है। यह दक्षिण अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच स्थित है। इस जगह पर किसी भी देश का अधिकार नहीं है। इस स्थान के बारे में यदि आप गूगल पर सर्च करना चाहते हैं, तो आपको Oceanic Pole of Inaccessibility सर्च करना पड़ेगा, जिससे आपको यहां के बारे में पूरी जानकारी डिटेल्स में मिल जाएगी। यह पॉइंट नियमों का दूसरा नाम है, जिसका लैटिन मतलब होता है “कोई नहीं”। बता दें कि पॉइंट नेम पर कोई नहीं आ सकता है।

इंसानों से है कोसो दूर

हालांकि, इसके सबसे नजदीक इंसानों की बस्ती है जो की 2688 किलोमीटर दूर है। बता दें कि पॉइंट नेम का इस्तेमाल कुछ चीजों के लिए किया जाता है। जैसे जब स्पेसक्राफ्ट या फिर सैटेलाइट पुराने हो जाते हैं, तो उन्हें पॉइंट नेम पर ही गिराया जाता है, क्योंकि यह इंसानी बस्ती से बहुत दूर है और यहां पर कोई आ नहीं सकता, इसलिए इस जगह का इस्तेमाल किया जाता है। मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार, 250 से ज्यादा स्पेसक्राफ्ट या फिर सैटेलाइट को धरती की इस जगह पर गिराया जा चुका है, जिससे अब तक किसी प्रकार का कोई नुकसान भी नहीं हुआ है।

सुनाई देती है रहस्मयी आवाजें

इस जगह का इस्तेमाल सबसे अधिक वैज्ञानिक खोजबीन के लिए करते हैं। सन्नाटे के कारण यहां किसी की भी रूह कांप जाती है। परिंदे भी पर मारने पहले 10 बार सोचते हैं। यहां कई हजार किलोमीटर तक डरावनी आवाज सुनाई देती है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस स्थान के आगे, पीछे क्या है, इसका पता आज तक कोई भी नहीं लगा पाया है। साल 1997 में समुद्र वैज्ञानिकों ने पॉइंट नेम के पूर्व में लगभग 2000 किलोमीटर से रहस्यमय आवाज सुनी, जिसने वैज्ञानिकों को उलझा दिया था। कुछ लोगों ने इसे दूसरी दुनिया की आवाज माना। हालांकि, कुछ लोगों ने इसे चट्टानों के टूटने की आवाज बताई। फिलहाल, इसपर रिसर्च जारी है।

इतिहास

इस स्थान के इतिहास की बात करें, तो इसकी खोज सर्वे इंजीनियर Hrvoje Lukatela ने साल 1992 में की थी। यहां कोई भी इंसान जीव जंतु या वनस्पति नहीं है। जब यहां चट्टान टूटती है, तो उससे भयानक आवाज सुनाई देती है। इस कारण यह स्थान और भी ज्यादा डरावना हो जाता है।

Sanjucta Pandit
लेखक के बारे में
मैं संयुक्ता पंडित वर्ष 2022 से MP Breaking में बतौर सीनियर कंटेंट राइटर काम कर रही हूँ। डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन और बीए की पढ़ाई करने के बाद से ही मुझे पत्रकार बनना था। जिसके लिए मैं लगातार मध्य प्रदेश की ऑनलाइन वेब साइट्स लाइव इंडिया, VIP News Channel, Khabar Bharat में काम किया है। पत्रकारिता लोकतंत्र का अघोषित चौथा स्तंभ माना जाता है। जिसका मुख्य काम है लोगों की बात को सरकार तक पहुंचाना। इसलिए मैं पिछले 5 सालों से इस क्षेत्र में कार्य कर रही हुं। View all posts by Sanjucta Pandit
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