देश में पायलट-विमान अनुपात ‘पर्याप्त’, चिंता की कोई बात नहीं, सरकार ने संसद में दी जानकारी

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने हालिया फ्लाइट्स में हुई भारी गड़बड़ी के बाद कहा है कि घरेलू एयरलाइनों में पायलट और विमान का अनुपात पर्याप्त है। विमानन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने संसद में यह जानकारी दी। यह बयान इंडिगो की उड़ानों में हुए बड़े पैमाने पर व्यवधान के बाद आया है।
Minister of State for Aviation Murlidhar Mohol

नई दिल्ली: हाल ही में इंडिगो की उड़ानों में बड़े पैमाने पर हुई देरी और रद्दीकरण के बाद उठे सवालों के बीच केंद्र सरकार ने एक अहम जानकारी दी है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि देश की घरेलू एयरलाइनों में पायलट और विमान का मौजूदा अनुपात ‘पर्याप्त’ है और इसे लेकर चिंता की कोई बात नहीं है।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब पिछले महीने इंडिगो को पायलटों की थकान कम करने के लिए बनाए गए नए नियमों को लागू करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। इसके चलते सैकड़ों उड़ानें प्रभावित हुई थीं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी हुई और एयरलाइन की परिचालन क्षमता पर सवाल खड़े हुए।

राज्यसभा में सरकार ने क्या कहा?

विमानन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सभी एयरलाइंस अपने बेड़े के विस्तार और परिचालन की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पायलट-विमान अनुपात का मूल्यांकन करती हैं, ताकि उड़ानों का सुचारू संचालन सुनिश्चित हो सके।

“नियमित रूप से समीक्षा की जाती है, ताकि एयरलाइनों का संचालन निरंतर सुरक्षित रहे और पायलटों के आराम व काम के बीच संतुलन को नुकसान न पहुंचे। वर्तमान में भारत में घरेलू एयरलाइनों में पायलट-विमान अनुपात पर्याप्त है।” – मुरलीधर मोहोल, विमानन राज्य मंत्री

हालांकि, मंत्री ने इस संबंध में कोई विशेष आंकड़ा प्रस्तुत नहीं किया। DGCA के नियमों के अनुसार, प्रत्येक विमान के लिए कम से कम तीन सेट फ्लाइट क्रू और केबिन क्रू का होना अनिवार्य है।

अंतरराष्ट्रीय मानकों पर बने हैं नए नियम

मंत्री मोहोल ने यह भी स्पष्ट किया कि पायलटों के ड्यूटी घंटों और आराम को लेकर बनाए गए संशोधित नियम अंतरराष्ट्रीय मानकों के आधार पर तैयार किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इन नियमों को बनाने से पहले अमेरिका के फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA), यूरोपीय संघ सुरक्षा एजेंसी (EASA) और कनाडा समेत कई अन्य देशों के नियमों का अध्ययन किया गया।

उन्होंने कहा, “DGCA ने फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशंस (FDTL) नियम बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) के मानकों और सर्वोत्तम प्रथाओं को भी ध्यान में रखा है।”

इंडिगो में पहले भी आई थी समस्या

यह पहली बार नहीं है जब इंडिगो के संचालन में गड़बड़ी सामने आई है। स्रोत के मुताबिक, पिछले साल दिसंबर में भी एयरलाइन को समस्याओं का सामना करना पड़ा था। उस समय व्यवधान के मुख्य कारणों में उड़ानों का अत्यधिक इस्तेमाल, नियामक तैयारी की कमी और प्रबंधन व संचालन नियंत्रण में खामियां शामिल थीं।

Shyam Dwivedi
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7 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव.

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