असम की चुनावी राजनीति में दल-बदल का दौर तेज हो गया है। होली के अगले दिन गुरुवार को कांग्रेस के तीन निलंबित विधायक-कमलाख्या डे पुरकायस्थ, बसंत दास और शशिकांत दास सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव के बीच इस घटनाक्रम को विपक्षी खेमे में बड़ी राजनीतिक हलचल के तौर पर देखा जा रहा है।
गुवाहाटी में आयोजित कार्यक्रम में BJP की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने इन नेताओं को पार्टी की सदस्यता दिलाई। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा भी मौजूद रहे। तीन विधायकों के साथ दो अन्य नेता भी BJP में आए कांग्रेस के पूर्व संयुक्त सचिव पार्शा बॉब कालिता और तृणमूल कांग्रेस के पूर्व महासचिव कंगकन नाथ।
किन सीटों से आते हैं तीनों विधायक
कमलाख्या डे पुरकायस्थ करीमगंज (उत्तर) सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं। शशिकांत दास राहा और बसंत दास मंगलदोई (अनुसूचित जाति) सीट से विधायक हैं। इन तीनों के बारे में लंबे समय से कहा जाता रहा है कि वे मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के करीबी हैं और पिछले कुछ वर्षों में खुलकर BJP के पक्ष में रुख लेते रहे हैं।
शशिकांत दास ने करीब चार साल पहले, 2021 में, सत्तारूढ़ दल की नीतियों के समर्थन की घोषणा भी की थी। उसी पृष्ठभूमि में गुरुवार का यह शामिल होना चुनावी समीकरणों के लिहाज से पहले से बन रही राजनीतिक दिशा को औपचारिक रूप देने जैसा माना जा रहा है।
कांग्रेस पर लगातार दबाव
राज्य में करीब दस साल बाद सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही कांग्रेस के लिए पिछले कुछ हफ्ते कठिन रहे हैं। 22 फरवरी को कांग्रेस प्रदेश इकाई के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा के BJP में जाने से पार्टी को बड़ा झटका लगा था। पार्टी नेतृत्व ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं रुके और दल बदल लिया।
इसके बाद दो अन्य विधायक अब्दुल राशिद मंडल और शेरमन अली अहमद भी पिछले महीने रायजोर दल में चले गए। यानी कांग्रेस के लिए चुनौती सिर्फ BJP से सीधी टक्कर तक सीमित नहीं है, बल्कि संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखना भी बड़ा मुद्दा बन चुका है।
असम विधानसभा का मौजूदा गणित
126 सदस्यीय असम विधानसभा में इस समय मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के 26 सदस्य हैं। AIUDF के 15 विधायक हैं, CPI(M) का 1 और एक निर्दलीय सदस्य है। दूसरी तरफ सत्तारूढ़ NDA खेमे में BJP के 64 सदस्य हैं, AGP के 9, UPPL के 7 और बोडो पीपुल्स फ्रंट (BPF) के 3 विधायक शामिल हैं।
विधानसभा चुनाव से पहले यह अंकगणित इसलिए अहम है, क्योंकि असम में सत्ता विरोधी और सत्ता समर्थक दोनों खेमे सीट-स्तर पर अपने-अपने समीकरण मजबूत करने में लगे हैं। कांग्रेस असम सोनमिलितो मोर्चा नाम के विपक्षी गठबंधन का नेतृत्व कर रही है और उसने असम जातीय परिषद (AJP) तथा वाम दलों के साथ सीट-शेयरिंग समझौता किया है। हालांकि रायजोर दल के साथ समझौता अभी बाकी बताया जा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम का सीधा असर उम्मीदवार चयन, सीट समन्वय और चुनाव प्रचार की रणनीति पर पड़ना तय है। अप्रैल में चुनावी प्रक्रिया शुरू होने से पहले असम में राजनीतिक पैंतरेबाज़ी और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।






