महाराष्ट्र की राज्यसभा राजनीति में चल रही अटकलों के बीच शिवसेना (UBT) ने साफ कर दिया है कि प्रियंका चतुर्वेदी को इस बार फिर से उम्मीदवार नहीं बनाया जाएगा। पार्टी सांसद और नेता संजय राउत ने इसके पीछे दो वजहें गिनाईं वर्तमान सियासी समीकरण और एनसीपी (शरदचंद्र पवार) प्रमुख शरद पवार की उम्मीदवारी।
राउत ने कहा कि पार्टी की इच्छा थी कि प्रियंका चतुर्वेदी राज्यसभा के लिए फिर चुनी जाएं, लेकिन सीट पर मुकाबले की स्थिति में जरूरी संख्या उनके पास नहीं है। उनके मुताबिक, जब पवार जैसे वरिष्ठ नेता मैदान में हों तो इस सीट पर लड़ाई का गणित और कठिन हो जाता है।
“अगर सियासी समीकरण हमारे पक्ष में होते और शरद पवार चुनाव नहीं लड़ते तो शिवसेना (UBT) इस सीट पर चुनाव लड़ती।”- संजय राउत
महाराष्ट्र से राज्यसभा की 7 सीटें अगले महीने खाली हो रही हैं। इसी पृष्ठभूमि में महाविकास आघाडी के भीतर किस दल का उम्मीदवार उतरेगा, इस पर पिछले कुछ समय से चर्चा चल रही थी। कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव के लिए महाराष्ट्र में एमवीए उम्मीदवार के तौर पर शरद पवार के समर्थन का ऐलान कर दिया है, जिससे गठबंधन की दिशा स्पष्ट हो गई।
एमवीए में दावेदारी से स्पष्टता तक
इस फैसले ने उस विवाद पर विराम लगाया जिसमें एमवीए के तीनों घटक कांग्रेस, एनसीपी (शरदचंद्र पवार) और शिवसेना (UBT) अपने-अपने स्तर पर दावेदारी जता रहे थे। अब गठबंधन की ओर से समर्थन का केंद्र शरद पवार पर तय होता दिख रहा है, और शिवसेना (UBT) ने भी अपनी स्थिति सार्वजनिक रूप से स्पष्ट कर दी है।
राजनीतिक तौर पर यह संदेश भी अहम है कि सहयोगी दलों के बीच सीट बंटवारे और संख्या की वास्तविकता को देखते हुए रणनीतिक पीछे हटना भी अपनाया जा रहा है। राउत के बयान से यही संकेत मिलता है कि पार्टी ने इच्छा और गणित, दोनों का आकलन करके निर्णय लिया।
बीजेपी की 4 नामों वाली सूची पर राउत की प्रतिक्रिया
राज्यसभा चुनाव को लेकर बीजेपी ने बुधवार को महाराष्ट्र से 4 उम्मीदवारों की घोषणा की थी। सूची में केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले और विनोद तावड़े के साथ नागपुर की पूर्व महापौर माया चिंतामन इवनाते और रामराव वाडकुटे शामिल हैं। वाडकुटे विधान परिषद के सदस्य रह चुके हैं।
संजय राउत ने बीजेपी की सूची पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि रामदास आठवले का दोबारा नामांकन पहले से तय माना जा रहा था, जबकि विनोद तावड़े की उम्मीदवारी चौंकाने वाली है। राउत के अनुसार, तावड़े ने संगठन को मजबूत करने में काम किया और राज्यसभा के लिए उनका नामांकन उन प्रयासों का पुरस्कार माना जा सकता है।
कुल मिलाकर, महाराष्ट्र में राज्यसभा चुनाव से पहले दो बड़ी बातें एक साथ सामने आई हैं-एमवीए खेमे में शरद पवार के नाम पर सहमति और बीजेपी की चार-सदस्यीय सूची के जरिए मुकाबले की शुरुआती रेखा। अगले महीने होने वाले चुनाव में अब ध्यान संख्या के अंतिम गणित और औपचारिक नामांकन प्रक्रिया पर रहेगा।





