महाराष्ट्र में राज्यसभा चुनाव की तस्वीर अब साफ से ज्यादा जटिल दिख रही है। शुरुआत में इसे संख्या बल के आधार पर लगभग तय मुकाबला माना जा रहा था, लेकिन उम्मीदवारों की संभावित रणनीतियों ने चुनाव को खुला बना दिया है। खासकर महाविकास आघाड़ी की तरफ से शरद पवार की संभावित एंट्री और शिंदे गुट की आक्रामक तैयारी ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है।
16 मार्च को मतदान होना है। देश के 10 राज्यों की 30 सीटों पर वोट डाले जाएंगे, जिनमें महाराष्ट्र की 7 सीटें शामिल हैं। मौजूदा समीकरणों के आधार पर महायुति के 6 और महाविकास आघाड़ी के 1 उम्मीदवार की जीत की संभावना जताई जा रही है, लेकिन अंतिम तस्वीर उम्मीदवारों की संख्या और क्रॉस-वोटिंग की संभावनाओं पर भी निर्भर करेगी।
शरद पवार के इर्द-गिर्द केंद्रित हो रहा मुकाबला
इस चुनाव का राजनीतिक केंद्र बिंदु फिलहाल शरद पवार बनते दिख रहे हैं। महाविकास आघाड़ी की ओर से उनका नाम लगभग तय माना जा रहा है। दूसरी तरफ महायुति के भीतर, खासकर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना की रणनीति पर सबसे ज्यादा नजर है।
सूत्रों के मुताबिक, शिवसेना की ओर से दो उम्मीदवार उतारे जाने पर विचार हो रहा है। अगर ऐसा होता है तो मुकाबला सीधे संख्या गणित से निकलकर प्राथमिकता वोट, अतिरिक्त वोट और दलों की अंदरूनी रणनीति के खेल में बदल सकता है। यही वजह है कि इस बार चुनाव को सिर्फ औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि शक्ति परीक्षण के रूप में देखा जा रहा है।
बीजेपी ने घोषित किए चार नाम, बाकी दलों में प्रतीक्षा
भारतीय जनता पार्टी ने महाराष्ट्र राज्यसभा चुनाव के लिए अपने 4 उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। घोषित नामों में पूर्व मंत्री विनोद तावड़े, आरपीआई (आठवले गुट) के प्रमुख और केंद्रीय राज्य मंत्री रामदास आठवले, हिंगोली के भाजपा नेता रामराव वडकुते और नागपुर की भाजपा नेता माया इवनाते शामिल हैं।
उधर महाविकास आघाड़ी की तरफ से शरद पवार का नाम प्रमुख रूप से सामने है। अजित पवार गुट की ओर से पार्थ पवार के नाम की चर्चा चल रही है। हालांकि शिवसेना ने अभी तक अपने उम्मीदवारों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं, जिससे सस्पेंस बना हुआ है और राजनीतिक अटकलें तेज हैं।
जीत का फॉर्मूला: 37 पहली वरीयता वोट
राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए किसी भी उम्मीदवार को पहली वरीयता के कम से कम 37 वोट चाहिए होते हैं। मौजूदा संख्या बल के हिसाब से महायुति के पास करीब 232 विधायकों का समर्थन बताया जा रहा है। यह आधार महायुति को बढ़त देता है, लेकिन अतिरिक्त वोटों के इस्तेमाल की रणनीति से मुकाबले की दिशा बदल सकती है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, शिंदे गुट के पास करीब 20 अतिरिक्त वोट माने जा रहे हैं, जबकि अजित पवार गुट के पास लगभग 3 अतिरिक्त वोट बताए जा रहे हैं। यही अतिरिक्त वोट तय करेंगे कि चुनाव एकतरफा जाएगा या फिर अंतिम चरण तक कड़ा रहेगा।
कुल मिलाकर, महाराष्ट्र का राज्यसभा चुनाव इस बार सिर्फ सीटों का बंटवारा नहीं, बल्कि गठबंधनों की वास्तविक मजबूती की परीक्षा भी है। 16 मार्च की वोटिंग से पहले उम्मीदवारों के अंतिम नाम और वोट मैनेजमेंट इस चुनाव की सबसे निर्णायक कड़ी बन गए हैं।






