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ना बारिश, ना धुंध… फिर भी वंदे भारत छोड़ बाकी सभी ट्रेनें लेट, भोपाल-दिल्ली रूट पर यात्रियों की बढ़ी परेशानी

Written by:Bhawna Choubey
Published:
जब वंदे भारत समय पर चल रही है, लेकिन बाकी एक्सप्रेस ट्रेनें रोज लेट हो रही हैं, तो जाहिर है यात्री परेशान होंगे। जानिए क्यों बिगड़ रही है रानी कमलापति से दिल्ली जाने वाली ट्रेनों की टाइमिंग और क्या है इसका असर।
ना बारिश, ना धुंध… फिर भी वंदे भारत छोड़ बाकी सभी ट्रेनें लेट, भोपाल-दिल्ली रूट पर यात्रियों की बढ़ी परेशानी

अगर आप रानी कमलापति स्टेशन (Bhopal) से दिल्ली जाने वाली ट्रेनों में सफर करते हैं, तो आपने ज़रूर नोट किया होगा ट्रेनें अब पहले जैसी टाइम पर नहीं चल रहीं। कई ट्रेनें, जो पहले स्पेशल कैटेगरी में आती थीं, अब सामान्य मौसम में भी 1 से 1.5 घंटे की देरी से पहुंच रही हैं। किसी को ऑफिस या काम से जाना हो, तो टाइम से निकलने के बाद भी स्टेशन पर इंतज़ार करना पड़ रहा है।

वहीं दूसरी तरफ, वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी महंगी ट्रेनें टाइम से चल रही हैं। अब सवाल उठता है कि जब वंदे भारत जैसी ट्रेनें वक्त पर पहुंच सकती हैं, तो बाकी ट्रेनें क्यों नहीं? जबकि अभी तो मौसम सामान्य है, सर्दियों में जब कोहरा बढ़ेगा, तब हालत और खराब हो सकती है।

रानी कमलापति से दिल्ली जाने वाली ट्रेनों की हालत

पहले जो ट्रेनें स्पेशल कहलाती थीं, वो अब रोजाना लेट चलने लगी हैं। कई वेबसाइटों के आंकड़ों में दिखता है कि इन ट्रेनों का टाइम लगातार बिगड़ रहा है। कई यात्रियों का कहना है कि अब उन्हें कभी नहीं पता होता कि ट्रेन कितनी देर में आएगी। पहले जहां लोग भरोसे के साथ कहते थे कि हमारी ट्रेन टाइम पर है, अब वो खुद मोबाइल पर लाइव स्टेटस देखते रहते हैं कि आखिर ट्रेन कहां अटकी है। इस देरी की वजह से लोगों के ऑफिस, मीटिंग्स और फैमिली प्लान्स तक गड़बड़ा जाते हैं।

रेलवे के बहाने और देरी के कारण

1. ट्रैक पर ट्रैफिक बढ़ गया है
अब एक ही ट्रैक पर एक्सप्रेस ट्रेनें, मालगाड़ियाँ और स्पेशल ट्रेनें चल रही हैं। जब ट्रैक फुल रहता है, तो किसी भी ट्रेन को पहले चलाना मुश्किल हो जाता है। इसी वजह से ट्रेनों को रास्ते में कई जगह रुकना पड़ता है।

2. मेंटेनेंस और ब्लॉक
रेल ट्रैक और सिग्नल की मेंटेनेंस जरूरी होती है। लेकिन जब ब्लॉक लिया जाता है, तो उस दौरान कई ट्रेनों को रोकना पड़ता है या धीमी चलाना पड़ता है। इससे टाइम बिगड़ जाता है।

3. पुराने सिग्नल सिस्टम और कोऑर्डिनेशन की कमी
कई जगहों पर सिग्नल सिस्टम अब भी पुराने हैं। ऊपर से अलग-अलग विभागों के बीच सही तालमेल न होने की वजह से ट्रेनें बीच में रुक जाती हैं। यात्रियों को ये नहीं बताया जाता कि देरी क्यों हो रही है, जिससे उनकी नाराज़गी और बढ़ जाती है।

वंदे भारत क्यों टाइम पर है?

वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें टाइम पर इसलिए चल रही हैं क्योंकि इन्हें रेलवे की सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जाती है। इनके लिए ट्रैक, सिग्नल और स्टाफ सब कुछ तैयार रहता है। जबकि बाकी ट्रेनें, खासकर सामान्य एक्सप्रेस, को उतनी सुविधा नहीं मिलती। यही फर्क यात्रियों को महसूस होता है, जब वंदे भारत सही वक्त पर चलती है और बाकी ट्रेनें लेट, तो लोगों को लगता है कि उनकी ट्रेन सेकंड क्लास सर्विस बन गई है।

यात्रियों पर असर

जरूरी काम बिगड़ रहे हैं
कई लोग नौकरी, मीटिंग या किसी जरूरी काम से दिल्ली आते-जाते हैं। जब ट्रेन लेट होती है, तो उनका पूरा दिन गड़बड़ा जाता है। जो लोग एकदम समय से निकलते हैं, उन्हें कई बार स्टेशन पर घंटों इंतज़ार करना पड़ता है।

भरोसा टूट रहा है
पहले लोग कहते थे रेलवे टाइम पर चलता है”, लेकिन अब यही भरोसा कम होता जा रहा है। हर यात्री सोचता है, पता नहीं आज कितनी देर लेगी। इससे रेलवे की साख पर भी असर पड़ता है।

सर्दियों में हाल और खराब होगा
अभी तो मौसम सामान्य है, लेकिन सर्दियों में कोहरा बढ़ने पर ट्रेनें और ज्यादा लेट होंगी। मतलब यात्रियों को पहले से ही अपने सफर की तैयारी करनी पड़ेगी और अपनी योजनाएँ थोड़ा बदलनी होंगी।

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Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
मुझे लगता है कि कलम में बहुत ताकत होती है और खबरें हमेशा सच सामने लाती हैं। इसी सच्चाई को सीखने और समझने के लिए मैं रोज़ाना पत्रकारिता के नए पहलुओं को सीखती हूँ। View all posts by Bhawna Choubey
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