पश्चिम बंगाल चुनाव के पहले चरण में 92% से ज्यादा वोटिंग पर CJI सूर्यकांत ने जताई खुशी, कहा “लोकतंत्र के लिए सकारात्मक संकेत”

चुनाव का पहला चरण खत्म होने के बाद अब सभी की नजर अगले चरण पर टिक गई है। आगामी चरण में भी कई अहम सीटों पर मतदान होना है और चार मई के नतीजों में स्पष्ट हो जाएगा कि राज्य की जनता ने किसपर अपना भरोसा जताया है।
CJI Suryakant

फाइल फोटो

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में हुए भारी मतदान ने देशभर का ध्यान आकर्षित किया है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान भी यह मुद्दा गूंजा जब मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने 92 प्रतिशत से अधिक मतदान पर खुशी जताई। उन्होंने मतदान प्रतिशत पर संतोष व्यक्त करते हुए इसे लोकतंत्र के लिए सकारात्मक संकेत बताया है।

पहले चरण के तहत राज्य के विभिन्न जिलों की कई विधानसभा सीटों पर मतदान कराया गया। गुरुवार सुबह से ही मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें देखी गईं, जिनमें युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों की उल्लेखनीय भागीदारी रही। ग्रामीण इलाकों में विशेष रूप से मतदान को लेकर अधिक उत्साह देखा गया, जहां लोगों ने शुरुआती घंटों से ही अपने मताधिकार का उपयोग किया। चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। केंद्रीय बलों की तैनाती के साथ संवेदनशील और अतिसंवेदनशील बूथों पर विशेष निगरानी रखी गई थी।

CJI ने वोटिंग प्रतिशत पर जताई खुशी 

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में हुई अभूतपूर्व वोटिंग ने न सिर्फ राजनीतिक दलों का ध्यान खींचा है, बल्कि न्यायपालिका के सर्वोच्च स्तर पर भी इसकी गूंज सुनाई दी है। सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन से जुड़े मामले की सुनवाई चल रही थी। इसी दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने 23 अप्रैल को पश्चिम बंगाल में पहले चरण में अभूतपूर्व मतदान पर खुशी ज़ाहिर की। उन्होंने कहा कि एक जागरूक नागरिक के रूप में लोगों को बढ़-चढ़कर मतदान करते देखना उत्साहजनक है और यह लोकतांत्रिक प्रणाली की मजबूती को दर्शाता है।

अदालत में एसआईआर से जुड़े मामलों पर सुनवाई

यह टिप्पणी उस समय आई जब सर्वोच्च न्यायालय 71 ऐसे याचिकाकर्ताओं की अपील पर विचार कर रहा था, जिनके नाम विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची से हटा दिए गए थे। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उन्हें मतदान के अधिकार से वंचित कर दिया गया, जबकि उनका मामला अब अपीलीय ट्रिब्यूनल में विचाराधीन है। इस मामले की सुनवाई तीन सदस्यीय पीठ कर रही है, जिसमें सूर्यकांत के साथ न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचौली शामिल हैं। पीठ के समक्ष यह भी बताया गया कि बड़ी संख्या में ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के बाद लोग अपील की प्रक्रिया में हैं।

Shruty Kushwaha
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Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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