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World Heritage Day : UNESCO की लिस्ट में भारत 6वें नंबर पर, विश्व धरोहर दिवस पर जानिए रोचक तथ्य

Written by:Shruty Kushwaha
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क्या आप जानते हैं कि सबसे पुराना विश्व धरोहर स्थल इक्वाडोर का गैलापागोस द्वीपसमूह है जिसे 1978 में शामिल किया गया। फिर नंबर आता है इथियोपिया का अक्सम और जॉर्डन का पेट्रा जो 1980 से विश्व धरोहर सूची में प्राचीन सभ्यताओं के प्रतीक के रूप में दर्ज हैं। वहीं, ऑस्ट्रेलिया का ग्रेट बैरियर रीफ दुनिया का सबसे बड़ा coral reef system है, जो अंतरिक्ष से दिखाई देता है। जापान का हिरोशिमा शांति स्मारक युद्ध की विभीषिका और शांति का प्रतीक है।
World Heritage Day : UNESCO की लिस्ट में भारत 6वें नंबर पर, विश्व धरोहर दिवस पर जानिए रोचक तथ्य

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World Heritage Day : आज विश्व धरोहर दिवस है। हर साल 18 अप्रैल को ये दिन विश्व धरोहर स्थलों के संरक्षण और उनके महत्व के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से मनाया जाता है। यह दिन UNESCO द्वारा घोषित किया गया था और इसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहरों की रक्षा करना है।

विश्व धरोहर दिवस, जिसे “स्मारकों और स्थलों के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस” (International Day for Monuments and Sites) के रूप में भी जाना जाता है, दुनियाभर की धरोहरों को संरक्षित करने के लिए बहुत अहम दिन है। ये दिन हमारे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने के महत्व को उजागर करता है। ये समझना आवश्यक है कि विश्व धरोहर स्थलों की सुरक्षा के बिना हमारी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान कमजोर पड़ सकती है।

World Heritage Day का उद्देश्य

विश्व धरोहर दिवस का मुख्य उद्देश्य मानव सभ्यता से जुड़े ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक स्थलों के महत्व को उजागर करना और उनके संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना है। यह दिन दुनिया भर की धरोहरों जैसे प्राचीन स्मारकों, ऐतिहासिक इमारतों, पुरातात्विक स्थलों और प्राकृतिक परिदृश्यों को संरक्षित करने की आवश्यकता पर जोर देता है।

विश्व धरोहर दिवस का महत्व

हम हमारे अतीत की गौरवशाली कहानियों, कला, संस्कृति, युद्ध, हार-जीत के साक्ष्यों को संरक्षित कर सकें..हमारी आने वाली पीढ़ियां भी इनके माध्यम से अपने इतिहास को जाने, ये जरूरी है। ये धरोहरें न सिर्फ किसी देश की सभ्यता और संस्कृति का प्रतीक हैं, बल्कि मानवता के साझा इतिहास का हिस्सा भी हैं। इनके संरक्षण से सांस्कृतिक पहचान बनी रहती है। विश्व धरोहर स्थल पर्यटन को बढ़ावा देते हैं, जो स्थानीय और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करता है। ये स्थल भावी पीढ़ियों को इतिहास, कला और संस्कृति के बारे में जानकारी देते हैं। साथ ही प्राकृतिक धरोहर स्थलों के संरक्षण से जैव-विविधता और पर्यावरण की रक्षा भी होती है।

विश्व धरोहर दिवस का इतिहास और थीम

इंटरनेशनल काउंसिल ऑन मॉन्यूमेंट्स एंड साइट्स (ICOMOS) ने 1982 में एक संगोष्ठी के दौरान 18 अप्रैल को “अंतर्राष्ट्रीय स्मारक और स्थल दिवस” के रूप में मनाने का प्रस्ताव रखा। यह प्रस्ताव सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण के लिए जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से रखा गया था। 1983 में यूनेस्को ने अपने 22वें महासम्मेलन के दौरान ICOMOS के प्रस्ताव को स्वीकार किया और 18 अप्रैल को आधिकारिक तौर पर विश्व धरोहर दिवस के रूप में मान्यता दी। तब से यह दिवस वैश्विक स्तर पर मनाया जाता है।

इस साल विश्व धरोहर दिवस की थीम ‘Heritage under Threat from Disasters and Conflicts’ है। यह थीम सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहरों पर प्राकृतिक आपदाओं (जैसे भूकंप, बाढ़, जंगल की आग) और मानव-निर्मित संघर्षों (जैसे युद्ध, आतंकवाद, विनाश) के बढ़ते खतरों पर ध्यान केंद्रित करती है। इनसे कैसे अपनी धरोहरों को बचाया जाए..ये चिंतन का विषय है।

दुनिया में कितने विश्व धरोहर हैं

जुलाई 2024 तक यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में 168 देशों में कुल 1,223 विश्व धरोहर स्थल  शामिल हैं। इनमें 952 सांस्कृतिक, 231 प्राकृतिक और 40 मिश्रित (सांस्कृतिक और प्राकृतिक दोनों) स्थल हैं। इनमें इटली पहले नंबर पर है जहां सबसे अधिक विश्व धरोहर हैं। इसके बाद आता है नंबर चीन का। फिर जर्मनी, फ्रांस और स्पेन हैं। भारत इस फेहरिस्त में छठें नंबर पर है। भारत में 43 यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल हैं। इनमें ताजमहल, अजंता-एलोरा गुफाएं, आगरा का किला, कुतुब मीनार, सुंदरबन नेशनल पार्क, पश्चिमी घाट, काजीरंगा नेशनल पार्क जैसे ऐतिहासिक और प्राकृतिक स्थल शामिल हैं।

बता दें कि कोई भी देश पहले अपने स्थलों को यूनेस्को की Tentative List में शामिल करता है। इसके बाद विशेषज्ञों द्वारा उसके ऐतिहासिक, सांस्कृतिक या प्राकृतिक महत्व का मूल्यांकन किया जाता है। यह प्रक्रिया कई सालों तक चल सकती है जिसमें हर पहलू पर गहन अध्ययन किया जाता है..जिसके बाद किसी स्थल को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया जाता है।

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Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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