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विश्व शांति दिवस: विश्व बंधुत्व से मानव कल्याण तक, जानिए इस दिन का इतिहास, उद्देश्य और महत्व

मन की शांति से दुनियाभर की शांति तक...ये सफर छोटे-छोटे प्रयासों से ही शुरू होता है। जब मनुष्य के भीतर संवेदना, सम्मान और सद्भाव की भावना मजबूत होती है तभी परिवार, समाज और देशों के बीच शांति की राह बनती है। आज का दिन इसी बात की याद दिलाता है कि दुनिया बदलने से पहले अपने भीतर शांति और सद्भाव पैदा करना जरूरी है।
World Peace Day

World Peace Day

आज विश्व शांति दिवस है। हर साल 21 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन दुनिया में शांति, अहिंसा, आपसी सहयोग और सद्भाव को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मनाया जाता है। इसका संदेश सिर्फ देशों के बीच युद्ध और संघर्ष को रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में आपसी सम्मान, संवाद और भाईचारे की भावना को मजबूत करना भी है।

विश्व शांति दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल से हमारे भारत ने विश्व शांति के संदेश के साथ विश्व बंधुत्व, मानव कल्याण और परस्पर सहयोग को बढ़ावा देने के प्रयास किए हैं। यह अवसर प्रेरित करता है कि समानता, सहयोग और सद्भावना से विश्व शांति में सभी सहभागी बनें।

क्यों मनाया जाता है विश्व शांति दिवस

विश्व शांति दिवस मनाने के पीछे मुख्य उद्देश्य दुनिया के देशों और लोगों को शांति के महत्व के प्रति जागरूक करना है। यह दिन युद्ध, हिंसा और संघर्ष के बजाय बातचीत, समझ और सहयोग का रास्ता अपनाने का संदेश देता है। साथ ही लोगों को यह याद दिलाता है कि स्थायी शांति सिर्फ सरकारों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के हर व्यक्ति की इसमें भूमिका होती है।

विश्व शांति दिवस का इतिहास

अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 1981 में की थी। उस समय सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा के नियमित सत्र के उद्घाटन के अवसर पर शांति को समर्पित एक दिन मनाने का फैसला लिया गया था। पहला अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस सितंबर 1982 में मनाया गया।

इसके बाद वर्ष 2001 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 21 सितंबर को स्थायी रूप से अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस के रूप में निर्धारित किया। इस दिन को युद्धविराम और अहिंसा के संदेश से भी जोड़ा गया। इसके बाद हर साल 21 सितंबर को दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में शांति से जुड़े कार्यक्रम और जागरूकता अभियान आयोजित किए जाते हैं।

इस दिन का उद्देश्य 

इस दिवस का उद्देश्य लोगों और देशों के बीच शांति की संस्कृति को बढ़ावा देना है। इसके तहत हिंसा और संघर्ष को कम करने, आपसी संवाद बढ़ाने, मानवाधिकारों के सम्मान और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने पर जोर दिया जाता है। बच्चों और युवाओं को भी शांति, सहिष्णुता और सहयोग के मूल्यों से जोड़ना इस दिन की भावना का हिस्सा है।

आमतौर पर शांति को युद्ध की अनुपस्थिति से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इसका दायरा इससे कहीं व्यापक है। किसी समाज में शांति तभी मजबूत मानी जाती है जब लोगों के बीच सुरक्षा, सम्मान, समानता और विश्वास का माहौल हो। भेदभाव, नफरत और हिंसा को कम करना तथा असहमति के बावजूद संवाद बनाए रखना भी शांति की प्रक्रिया का हिस्सा है।

आज के समय में बढ़ गया है महत्व

दुनिया में बदलते राजनीतिक और सामाजिक हालात के बीच शांति का महत्व और बढ़ गया है। कई क्षेत्रों में संघर्ष, हिंसा और मानवीय संकट की स्थितियां बनी हुई हैं। इसके साथ ही समाजों के भीतर भी अलग-अलग मुद्दों को लेकर तनाव और विभाजन की स्थिति भी देखने को मिल रही हैं। ऐसे समय में बातचीत और सहयोग के रास्ते खुले रखना जरूरी हो जाता है।

तकनीक और सोशल मीडिया के दौर में सूचनाएं बहुत तेजी से लोगों तक पहुंचती हैं। ऐसे में गलत जानकारी, नफरत और भड़काऊ संदेश भी तेजी से फैल सकते हैं। इसलिए शांति का संदेश अब सिर्फ अंतरराष्ट्रीय संबंधों तक सीमित नहीं है बल्कि रोजमर्रा के सामाजिक व्यवहार और डिजिटल संवाद में भी इसकी जरूरत महसूस होती है। विश्व शांति दिवस इसी बात की याद दिलाता है कि शांति किसी एक दिन का संकल्प नहीं बल्कि लगातार किए जाने वाले प्रयासों का परिणाम है।

https://twitter.com/DrMohanYadav51/status/2101856781417042410

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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