आजाद अध्यापक शिक्षक संघ की जिला इकाई ने रविवार को अपनी लंबित मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया। प्रांतीय संगठन के आह्वान पर गुरु गोविंद सिंह स्टेडियम में शिक्षकों ने सामूहिक उपवास रखा। इस प्रदर्शन में जिलेभर से बड़ी संख्या में शिक्षक अपनी आवाज बुलंद करने पहुंचे। अनशन खत्म होने के बाद शिक्षकों ने ‘शिक्षक अधिकार सम्मान रैली’ निकाली और जिलाध्यक्ष शिवनाथ प्रसाद मिश्र की अगुवाई में मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।
‘TET से मिले छूट और लागू हो पुरानी पेंशन’
ज्ञापन में शिक्षकों की कई सालों पुरानी मांगों को पुरजोर तरीके से उठाया गया। संघ ने मांग रखी कि सालों से पढ़ा रहे अनुभवी सेवारत शिक्षकों पर नई पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता थोपना सरासर गलत है, इसलिए इन्हें इससे राहत दी जाए। इसके अलावा, सेवा अवधि की गणना पहली नियुक्ति की तारीख से करने की बात कही गई, ताकि पेंशन, ग्रेच्युटी और अर्जित अवकाश का सही फायदा मिल सके। साथ ही सामाजिक सुरक्षा के लिए पुरानी पेंशन योजना को तुरंत बहाल करने पर जोर दिया गया।
ऑनलाइन हाजिरी की व्यवस्था खत्म करने पर जोर
शिक्षकों ने मोबाइल आधारित ई-अटेंडेंस व्यवस्था का जमकर विरोध किया। उनका कहना था कि ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में नेटवर्क और स्थानीय परिस्थितियों की वजह से यह व्यवस्था पूरी तरह अव्यावहारिक साबित हो रही है। संघ ने इसे हटाकर कोई सहज और व्यावहारिक विकल्प लाने की मांग की। इसके साथ ही सितंबर 2022 की हड़ताल अवधि का रुका हुआ वेतन भी तुरंत जारी करने की बात कही गई।
एनपीएस कटौती और क्रमोन्नति के आदेश जल्द जारी करने की मांग
प्रदर्शनकारियों ने लंबे समय से अटकी क्रमोन्नति और समयमान वेतनमान के आदेश तुरंत जारी करने का मुद्दा भी उठाया। ज्ञापन में यह बात प्रमुखता से रखी गई कि शिक्षकों के NPS खाते से जो कटौती की राशि मिसिंग या गायब दिख रही है, उसे बिना किसी देरी के संबंधित शिक्षकों के खातों में समायोजित किया जाए।
मांगें न मानने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी
जिलाध्यक्ष शिवनाथ प्रसाद मिश्र ने कहा कि शिक्षक लंबे समय से अपनी वाजिब मांगों के लिए आवाज उठा रहे हैं, लेकिन शासन की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने जल्द ही इन समस्याओं का सकारात्मक समाधान नहीं निकाला, तो प्रांतीय निकाय के निर्देशानुसार इस आंदोलन को प्रदेश स्तर पर और ज्यादा तेज किया जाएगा।






