
दिल्ली में बाढ़ का खतरा तेजी से बढ़ता नजर आ रहा है। दरअसल, हरियाणा के यमुनानगर स्थित हथिनीकुंड बैराज से भारी मात्रा में पानी छोड़ा गया है। बैराज पर पानी का स्तर रिकॉर्ड 1 लाख 9 हजार क्यूसेक तक पहुंच गया, जिसके बाद बैराज के सभी 18 गेट खोल दिए गए। अब तक यहां से डेढ़ लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा जा चुका है। सिंचाई विभाग ने इसे “मिनी फ्लड” घोषित कर दिया है और साफ संकेत दिए हैं कि आने वाले 48 से 72 घंटे में यह पानी दिल्ली पहुंचेगा। इसका सीधा असर राजधानी की स्थिति पर पड़ेगा, जहां पहले से ही लगातार बारिश के कारण हालात बिगड़े हुए हैं।
यमुना खतरे के निशान को छूने के करीब
दिल्ली में सोमवार को यमुना का जलस्तर 204.80 मीटर दर्ज किया गया। यह स्तर चेतावनी बिंदु 204.50 मीटर को पहले ही पार कर चुका है और अब खतरे के निशान 205.33 मीटर से कुछ ही दूरी पर है। सुबह 8 बजे तक नदी का स्तर और बढ़कर लगभग 205 मीटर तक पहुंच गया। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पानी का दबाव इसी गति से बढ़ता रहा, तो अगले 24 घंटे में नदी का स्तर खतरे के निशान से ऊपर जा सकता है। फिलहाल बैराजों से हो रहे डिस्चार्ज पर नजर डालें तो हथिनीकुंड से 58,282 क्यूसेक, वजीराबाद से 36,170 क्यूसेक, और ओखला बैराज से 68,025 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
निचले इलाकों में खतरे की आहट
बढ़ते जलस्तर का सबसे बड़ा असर दिल्ली के निचले इलाकों पर पड़ सकता है। प्रशासन ने आईटीओ घाट, मयूर विहार, गीता कॉलोनी और कश्मीरी गेट जैसे इलाकों में फ्लड अलर्ट जारी किया है। यहां रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है। राहत और बचाव दलों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीमों को संवेदनशील इलाकों में तैनात किया गया है ताकि हालात बिगड़ने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके। इसके अलावा दिल्ली सरकार ने स्कूलों और अस्पतालों के प्रबंधन को एडवाइजरी जारी करते हुए सतर्क रहने को कहा है।
प्रशासन और विशेषज्ञों की चिंता
विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली में बाढ़ के हालात हर साल बारिश और बैराज से छोड़े जाने वाले पानी की वजह से बिगड़ते हैं। राजधानी का बड़ा हिस्सा यमुना के किनारों से जुड़ा हुआ है, जहां अवैध बस्तियां और अस्थायी झुग्गियां बसी हैं। ऐसे में सबसे पहले यहीं पर पानी भरने का खतरा रहता है। दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सभी संबंधित एजेंसियां लगातार हालात पर नजर रखे हुए हैं। राहत शिविरों की तैयारी की जा रही है और प्रशासन ने नाव, पानी के पंप और मेडिकल टीमों को तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यदि बारिश का सिलसिला तेज हुआ, तो स्थिति और ज्यादा गंभीर हो सकती है। दिल्ली का ड्रेनेज सिस्टम पहले से ही कमजोर है और थोड़ी-सी बारिश में सड़कों पर जलभराव हो जाता है। ऐसे में यमुना का उफान राजधानी की जिंदगी को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर सकता है।
72 घंटे के लिए अलर्ट
दिल्ली में फिलहाल स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। हथिनीकुंड बैराज से छोड़ा गया पानी अगले दो से तीन दिनों में राजधानी तक पहुंचेगा और तब नदी का स्तर और भी खतरनाक रूप ले सकता है। प्रशासन ने भले ही अलर्ट जारी कर दिया हो, लेकिन वास्तविक परीक्षा तब होगी जब पानी निचले इलाकों में भरना शुरू करेगा। राजधानीवासियों के लिए अगले 72 घंटे बेहद अहम हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन और राहत दल इस चुनौती से कैसे निपटते हैं और क्या दिल्ली इस बार संभावित बाढ़ से सुरक्षित निकल पाएगी।
