
FIR to be lodged against Neemuch RTO officials
मध्य प्रदेश के नीमच क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) के बस पासिंग और रजिस्ट्रेशन घोटाले में अब राजस्थान परिवहन विभाग ने बेहद सख्त रुख अपना लिया है। राजस्थान की राजधानी जयपुर के गैरेज में बिना बॉडी बने ही कागजों पर नीमच से पास की गई दो बसों के मामले में जयपुर के प्रादेशिक परिवहन अधिकारी (RTO) राजेंद्र शेखावत ने एफआईआर (FIR) दर्ज करवाने के सख्त निर्देश दिए हैं। इस बड़ी कार्रवाई से मध्य प्रदेश से लेकर राजस्थान तक के परिवहन महकमे और दलालों के सिंडिकेट में हड़कंप मच गया है।
जयपुर RTO प्रथम की उड़नदस्ता टीम ने दिल्ली रोड स्थित खोले के हनुमान जी के पास गोविंद वाटिका क्षेत्र में चल रही एक अवैध बस बॉडी निर्माण इकाई पर छापामार कार्रवाई की। इस दौरान मौके पर दो बसें तैयार होती मिलीं। जयपुर आरटीओ राजेंद्र शेखावत के संज्ञान में मामला आने के बाद टीम ने त्वरित और सख्त कार्रवाई करते हुए दोनों निर्माणाधीन बसों (रजिस्ट्रेशन नंबर MP 44 ZG 9665 और MP 44 ZG 9465 को जप्त कर लिया है। मौके पर कई अन्य बसें भी बॉडी निर्माण के लिए खड़ी पाई गई हैं।
इन पर कसेगा कानूनी शिकंजा, दर्ज होगी एफआईआर
आरटीओ राजेंद्र शेखावत के स्पष्ट निर्देशों के बाद अब इस पूरे नेक्सस (गठजोड़) पर आपराधिक शिकंजा कसने जा रहा है। इस महाघोटाले में अब तीन मुख्य पक्षों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की जाएगी जिसमें अवैध रूप से बिना ट्रेड सर्टिफिकेट के बस बॉडी बिल्डिंग का काम करने वाले कारखाना संचालक मुबीर, नियमों को ताक पर रखकर फर्जी तरीके से रजिस्ट्रेशन करवाने वाले बस मालिक और बिना वाहन का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) किए सैकड़ों किलोमीटर दूर बैठे-बैठे ही फिटनेस व रजिस्ट्रेशन जारी करने वाले नीमच आरटीओ के अधिकारियों और मोटर व्हीकल इंस्पेक्टरों (MVI) शामिल हैं।
15 दिन पहले ही नीमच में हो गया था फर्जी रजिस्ट्रेशन
विभागीय जांच में यह चौंकाने वाला सच सामने आया है कि जिन दो बसों की बॉडी अभी जयपुर में बन ही रही थी, उनका करीब 15 दिन पहले ही मध्य प्रदेश के नीमच आरटीओ में रजिस्ट्रेशन किया जा चुका था। ट्रांसपोर्ट इंस्पेक्टर महेश पारीक की जांच में स्पष्ट हुआ कि बिना वैध ट्रेड सर्टिफिकेट और ‘बस बॉडी कोड’ (Bus Body Code) की धज्जियां उड़ाते हुए यहां 36 स्लीपर और वॉशरूम वाली बसें तैयार की जा रही थीं। बिना सुरक्षा मानकों को परखे इन बसों को पास करना सीधे तौर पर यात्रियों की जान से खिलवाड़ है।
नीमच RTO बोले दस्तावेज देखकर ही होता है रजिस्ट्रेशन
इस पूरे घटनाक्रम और अब जयपुर RTO द्वारा एफआईआर के आदेश के बाद नीमच आरटीओ कार्यालय में सन्नाटा पसरा हुआ है। यह स्पष्ट हो गया है कि नीमच परिवहन कार्यालय में एक बड़ा सिंडिकेट सक्रिय है। इस भारी अनियमितता और घोटाले पर जब नीमच RTO नंदलाल गामड़ से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा है कि वाहन पंजीकरण से पहले सभी दस्तावेज, फ़ोटोग्राफ और वीडियो की पूर्ण जाँच की जाती है और केवल सत्यापित होने पर ही रजिस्ट्रेशन किया जाता है। अब देखना यह है कि जयपुर से शुरू हुई यह कार्रवाई मध्य प्रदेश के परिवहन आयुक्त तक कब पहुंचती है और नीमच के उन ‘कागजी बाबूओं’ पर कब गाज गिरती है, जिन्होंने चंद रुपयों के लालच में नियमों की बलि चढ़ा दी।
पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

