नीमच जिले के जीरन तहसील क्षेत्र में मौसम के मिजाज ने किसानों की धड़कनें बढ़ा दीं। ग्राम पालसोड़ा, चल्दू, हार्कियाखाल और भाटखेड़ा सहित आसपास के अंचल में अचानक आए मौसम परिवर्तन के साथ तेज आंधी-तूफान और जोरदार बारिश का दौर शुरू हुआ। इस दौरान कई क्षेत्रों में भारी ओलावृष्टि हुई, जिससे खेतों में खड़ी लहलहाती फसलें पूरी तरह जमींदोज हो गई हैं। ओलों की मार इतनी भीषण थी कि देखते ही देखते खेतों और रास्तों पर सफेद चादर बिछ गई।

अफीम,कलौंजी, चिया सीड और गेहूं की फसलों को नुकसान
इस बेमौसम आपदा का सबसे घातक असर अफीम की फसल पर पड़ा है। पालसोड़ा और आसपास के गांवों से आ रही खबरों के मुताबिक, तेज आंधी और ओलों की चोट से अफीम के नाजुक पौधे टूट गए हैं और डोडों को भारी नुकसान पहुँचा है। अफीम के अलावा कलौंजी, चिया सीड और गेहूं की फसलों को भी कुदरत के इस कहर ने अपनी चपेट में ले लिया है। कलौंजी और चिया सीड की फसलें, जो कटाई के करीब थीं, ओलों की मार से पूरी तरह झड़ गई हैं, वहीं तेज हवाओं के चलते गेहूं की फसल खेतों में बिछ गई है।

अंधड़ और ओलावृष्टि ने संभलने का मौका तक नहीं दिया
क्षेत्र के किसानों का कहना है कि दोपहर बाद अचानक आए इस अंधड़ और ओलावृष्टि ने संभलने का मौका तक नहीं दिया। कड़ी मेहनत से तैयार की गई नकदी फसलें अब खेतों में बर्बादी के कगार पर हैं। विशेष रूप से अफीम की फसल को लेकर किसान बेहद चिंतित हैं, क्योंकि इसकी खेती बेहद संवेदनशील होती है और ओलों की मार के बाद फसल के बचने की उम्मीद बहुत कम रह गई है। इस प्राकृतिक आपदा ने जीरन क्षेत्र के अन्नदाता को संकट में डाल दिया है।
नीमच से कमलेश सारडा





