नीमच: स्थानीय ज्ञानोदय मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल पर लगे अपंजीकृत डॉक्टरों से इलाज कराने के गंभीर आरोपों के बाद अस्पताल प्रबंधन ने अपना पक्ष सामने रखा है। एक शिकायत के जवाब में अस्पताल ने 23 फरवरी 2026 को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय को एक पत्र सौंपकर दावा किया है कि उनके संस्थान में कार्यरत सभी चिकित्सक विधिवत पंजीकृत हैं।
अस्पताल प्रबंधन ने अपने जवाब के साथ 14 डॉक्टरों की एक विस्तृत सूची भी जमा की है, जिसमें उनके नाम, डिग्री, पद और मध्य प्रदेश मेडिकल काउंसिल के पंजीयन क्रमांक का उल्लेख है। यह कदम श्री राधेश्याम मेघवाल द्वारा की गई एक शिकायत के बाद उठाया गया है, जिसमें अस्पताल के कामकाज पर सवाल खड़े किए गए थे।
क्या था पूरा मामला?
दरअसल, सेमली चंद्रावत निवासी राधेश्याम मेघवाल ने स्वास्थ्य विभाग में शिकायत दर्ज कराई थी कि ज्ञानोदय हॉस्पिटल में कुछ ऐसे डॉक्टर सेवाएं दे रहे हैं जिनका मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण नहीं है। इस शिकायत के बाद प्रशासनिक जांच शुरू हुई थी। गौरतलब है कि इससे पहले भी अस्पताल पर आयुष्मान योजना में कथित अनियमितताओं को लेकर भी आरोप लग चुके हैं, जिसकी जांच चल रही है।
अस्पताल ने सूची में इन विशेषज्ञों का किया जिक्र
CMHO कार्यालय को सौंपी गई सूची के अनुसार, अस्पताल में विभिन्न विभागों के विशेषज्ञ कार्यरत हैं। प्रबंधन द्वारा दिए गए पत्र में बताया गया है कि उनके पास एमसीएच कार्डियोलॉजी, गायनेकोलॉजी, इंटेंसिव केयर, पैथोलॉजी, पल्मोनरी मेडिसिन और रेडियोलॉजी जैसे विशेषज्ञ मौजूद हैं।
इसके अलावा, जनरल सर्जरी, जनरल फिजिशियन, ऑर्थोपेडिक और एमडी मेडिसिन के डॉक्टर भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों के अलावा, सूची में चार ड्यूटी डॉक्टरों के नाम और उनके पंजीयन क्रमांक भी शामिल किए गए हैं। अस्पताल का कहना है कि उन्होंने जांच एजेंसियों द्वारा मांगे गए सभी आवश्यक दस्तावेज समय पर उपलब्ध करा दिए हैं और वे सभी नियमों का पालन कर रहे हैं।
अब दस्तावेजों के सत्यापन पर टिकी निगाहें
अस्पताल की ओर से औपचारिक जवाब और डॉक्टरों की सूची दाखिल होने के बाद अब गेंद स्वास्थ्य विभाग के पाले में है। CMHO कार्यालय के अधिकारी प्रस्तुत किए गए पंजीयन क्रमांकों और अन्य दस्तावेजों की सत्यता की जांच कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, रिकॉर्ड का सत्यापन पूरा होने के बाद ही इस मामले में कोई अगली कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरा मामला प्रशासनिक जांच के अधीन है और अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी।






