नीमच में युवाओं को खेलों से जोड़ने और नशे के खिलाफ जागरूक करने के उद्देश्य से आयोजित फुटबॉल टूर्नामेंट में हिंसा की घटना सामने आई है। दरअसल आरोप है कि मैच समाप्त होने के बाद कुछ लोगों ने NFA टीम के खिलाड़ियों पर लाठी, डंडों और लोहे की रॉड से हमला कर दिया। घटना के बाद घायल खिलाड़ी सीधे कैंट थाना पहुंचे और पुलिस से आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
दरअसल खिलाड़ियों का कहना है कि मैदान में जो हुआ, उसने खेल भावना को गहरी चोट पहुंचाई है। उनका आरोप है कि हमले में कई खिलाड़ियों को चोटें आईं और पूरे मामले ने प्रतियोगिता के माहौल को बिगाड़ दिया। टीम ने साफ कर दिया है कि जब तक दोषियों पर कानूनी कार्रवाई नहीं होती, तब तक वे इस टूर्नामेंट या किसी अन्य प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं लेंगे। दूसरी ओर पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी है और घटनास्थल से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जा रही है।
खिलाड़ियों ने सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
वहीं यह प्रतियोगिता पुलिस अधीक्षक के मार्गदर्शन में “नशे से दूरी है जरूरी 2.0” अभियान के तहत आयोजित की गई थी। इसका उद्देश्य युवाओं को खेलों के माध्यम से सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ना और नशे के खिलाफ जागरूक करना था। लेकिन मैच के बाद हुई हिंसा ने पूरे अभियान की भावना पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दरअसल NFA टीम के खिलाड़ियों का आरोप है कि मैच समाप्त होने के तुरंत बाद कुछ लोगों ने उन पर सुनियोजित तरीके से हमला किया। खिलाड़ियों के मुताबिक केवल हाथापाई ही नहीं हुई, बल्कि लाठी, डंडे और लोहे की रॉड का भी इस्तेमाल किया गया। इस घटना के बाद खिलाड़ियों ने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यदि किसी खेल प्रतियोगिता में प्रतिभागियों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होगी, तो भविष्य में खिलाड़ी ऐसे आयोजनों में भाग लेने से बचेंगे। खेल विशेषज्ञ भी मानते हैं कि किसी भी टूर्नामेंट में पर्याप्त सुरक्षा, त्वरित हस्तक्षेप और स्पष्ट अनुशासनात्मक नियम जरूरी होते हैं। ऐसी घटनाएं युवा खिलाड़ियों का मनोबल गिराती हैं और खेल के प्रति विश्वास को कमजोर करती हैं।
NFA टीम का फैसला और पुलिस जांच पर टिकी आगे की उम्मीद
वहीं घटना के बाद टूर्नामेंट के संचालन को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। NFA टीम के खिलाड़ियों ने आरोप लगाया है कि विवाद बढ़ने के दौरान आयोजकों की ओर से समय रहते प्रभावी हस्तक्षेप नहीं किया गया। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है। पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी लिए जा रहे हैं।
खिलाड़ियों ने कहा है कि उनका उद्देश्य किसी विवाद को बढ़ाना नहीं, बल्कि खेल के मैदान को सुरक्षित बनाना है। उनका मानना है कि यदि दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष और सख्त कार्रवाई होती है, तो भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सकती है। खेल आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, पर्याप्त पुलिस बल की मौजूदगी और मैच के बाद भी निगरानी बनाए रखने जैसे कदमों पर अब चर्चा तेज हो गई है।






