नीमच शहर के प्रमुख खेल मैदान को बचाने की मांग अब सड़क से लेकर जनप्रतिनिधियों तक पहुंच गई है। मैदान बचाओ समिति के सदस्य और बड़ी संख्या में खिलाड़ी मैदान के समर्थन में सामने आए हैं।
समिति ने सांसद प्रतिनिधि आदित्य मालू को ज्ञापन सौंपकर हायर सेकेंडरी स्कूल क्रमांक-2 के मैदान को सुरक्षित रखने की मांग की है। साथ ही समिति ने कहा है कि यहां संचालित PM SHRI विद्यालय को भी यथावत रखा जाए।
नीमच का यह मैदान क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
समिति ने अपने ज्ञापन में नीमच के इस मैदान की उपयोगिता को विस्तार से सामने रखा है। बताया गया कि यह शहर के प्रमुख और आसानी से पहुंच वाले खेल मैदानों में शामिल है। यहां केवल रोजाना खेल गतिविधियां ही नहीं होतीं, बल्कि कई बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।
स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्वों के कार्यक्रमों के लिए भी इस मैदान का इस्तेमाल होता है। इसके अलावा शासकीय कार्यक्रम, सार्वजनिक आयोजन, स्कूली खेल प्रतियोगिताएं और खिलाड़ियों के ट्रायल जैसी गतिविधियां भी यहां होती हैं। ऐसे में मैदान की जमीन का किसी दूसरे निर्माण में इस्तेमाल होने से खेल और सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए जगह कम हो सकती है।
PM SHRI स्कूल और मैदान दोनों को लेकर चिंता
ज्ञापन में PM SHRI विद्यालय को यथावत रखने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। समिति के अनुसार प्रस्तावित व्यवस्था का असर एक साथ कई संस्थानों और सुविधाओं पर पड़ सकता है। इसमें PM SHRI विद्यालय, कन्या विद्यालय और शहर का प्रमुख खेल मैदान शामिल हैं।
समिति ने PM SHRI परिसर में पहले से हुए निर्माण कार्य को लेकर भी सवाल उठाए हैं। ज्ञापन के अनुसार, परिसर में करीब 25 लाख रुपये की लागत से निर्माण कराया गया है। ऐसे में समिति का कहना है कि पहले से मौजूद व्यवस्था और खर्च किए गए सरकारी पैसे को ध्यान में रखते हुए आगे की योजना बनाई जानी चाहिए।
सांदीपनी स्कूल के लिए वैकल्पिक जमीन की मांग
मैदान बचाओ समिति ने साफ किया है कि वह सांदीपनी स्कूल के निर्माण के खिलाफ नहीं है। समिति की आपत्ति स्कूल बनाने को लेकर नहीं, बल्कि उसके लिए चुनी जा रही जगह को लेकर है।
समिति का कहना है कि सांदीपनी स्कूल के लिए किसी दूसरी सरकारी जमीन का चयन किया जा सकता है। इससे शहर को आधुनिक स्कूल भी मिल सकता है और मौजूदा खेल मैदान को भी बचाया जा सकता है। समिति के अनुसार, दोनों जरूरतों के बीच ऐसा रास्ता निकाला जाना चाहिए जिससे किसी एक सुविधा को खत्म करके दूसरी सुविधा खड़ी न करनी पड़े।
ज्ञापन में शहर के बीचों-बीच बड़े स्कूल के निर्माण से बढ़ने वाले यातायात दबाव की आशंका भी जताई गई है। समिति का कहना है कि स्कूल शुरू होने के बाद बड़ी संख्या में विद्यार्थियों, अभिभावकों और वाहनों की आवाजाही बढ़ सकती है। इससे आसपास के क्षेत्र में ट्रैफिक का दबाव बढ़ने के साथ दुर्घटना की आशंका भी पैदा हो सकती है।
खिलाड़ियों ने भी मैदान बचाने के लिए उठाई आवाज
इस पूरे मामले में खिलाड़ियों की मौजूदगी खास तौर पर चर्चा में रही। बड़ी संख्या में समिति सदस्यों और खिलाड़ियों ने सांसद प्रतिनिधि को ज्ञापन सौंपा। खिलाड़ियों के लिए मैदान का महत्व सबसे ज्यादा है, क्योंकि उनके अभ्यास और खेल गतिविधियों के लिए खुले मैदान की जरूरत होती है।
शहरों में लगातार बढ़ते निर्माण के बीच खुले मैदानों की संख्या कम होना खिलाड़ियों के लिए बड़ी समस्या बन सकता है। खासकर बच्चों और युवाओं के लिए खेल की सुविधा तभी मजबूत होती है, जब उनके पास पर्याप्त जगह और नियमित अभ्यास की सुविधा हो।
सांसद प्रतिनिधि आदित्य मालू ने दिया भरोसा
मैदान बचाओ समिति की ओर से सौंपे गए ज्ञापन को सांसद प्रतिनिधि आदित्य मालू ने प्राप्त किया। उन्होंने समिति की ओर से रखे गए सभी बिंदुओं को सांसद सुधीर गुप्ता तक पहुंचाने की बात कही।
आदित्य मालू ने कहा कि समिति और खिलाड़ियों की भावनाओं से सांसद को अवगत कराया जाएगा और इस विषय को उचित स्तर पर रखा जाएगा। इससे समिति को उम्मीद है कि मैदान और स्कूलों से जुड़े मुद्दे पर आगे बातचीत होगी।
यह मामला अब केवल स्थानीय स्तर की मांग तक सीमित नहीं रह गया है। समिति की ओर से जनप्रतिनिधि के सामने ज्ञापन सौंपे जाने के बाद आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर प्रशासनिक स्तर पर चर्चा होने की संभावना है। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि सांदीपनी स्कूल के लिए जमीन को लेकर आगे क्या फैसला होता है।






