जावद सब जेल में रक्षाबंधन पर भाई-बहन के रिश्ते की अनोखी तस्वीर देखने को मिली। दरअसल दूर-दराज से पहुंची बहनों ने सलाखों के पीछे बंद भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा और उनके बेहतर भविष्य की कामना की। मुलाकात के दौरान कई बहनों की आंखें नम हो गईं, जबकि बंदियों ने दोबारा अपराध न करने और नई जिंदगी शुरू करने का संकल्प लिया।
सुरक्षा व्यवस्था के बीच बहनों ने भाइयों को तिलक लगाकर राखी बांधी और मिठाई खिलाई। इस दौरान मुलाकात कक्ष में कई परिवार भावुक हो गए और लंबे समय बाद एक-दूसरे से मिलकर आंखें भर आईं।
बहनों ने दिलाया नई जिंदगी का संकल्प
वहीं मुलाकात के दौरान बहनों ने पूजा की थाली सजाकर पारंपरिक तरीके से रक्षाबंधन की रस्म निभाई। उन्होंने भाइयों के माथे पर तिलक लगाया, रक्षा सूत्र बांधा और उनके सुखी जीवन की कामना की। इस मौके पर कई बहनों ने अपने भाइयों से दोबारा अपराध का रास्ता नहीं अपनाने और समाज की मुख्यधारा में लौटने का आग्रह किया। बंदियों ने भी अपनी बहनों को भरोसा दिलाया कि वे भविष्य में अच्छे आचरण के साथ नई शुरुआत करने की कोशिश करेंगे। जेल प्रशासन के अनुसार रक्षाबंधन जैसे अवसर बंदियों के मानसिक और सामाजिक जुड़ाव के लिए भी अहम माने जाते हैं। परिवार से मुलाकात उन्हें सकारात्मक सोच की ओर प्रेरित करती है और समाज में वापस लौटने की उम्मीद मजबूत करती है। इसी वजह से मुलाकात का पूरा माहौल आत्मीय बना रहा और भाई-बहन के रिश्ते की गर्माहट सलाखों के पीछे भी महसूस की गई।
जेल प्रशासन की विशेष व्यवस्था से आसान हुई मुलाकात
रक्षाबंधन पर बड़ी संख्या में आने वाले परिजनों को देखते हुए जावद सब जेल में पहले से विशेष इंतजाम किए गए थे। जेल परिसर में टेंट, छाया, शुद्ध पेयजल और बैठने की व्यवस्था की गई, ताकि दूर-दराज से आने वाले लोगों को परेशानी न हो। सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रखी गई, लेकिन मुलाकात का माहौल सहज और व्यवस्थित बनाए रखने पर खास ध्यान दिया गया। जेलर अंशुल गर्ग ने बताया कि जेल मुख्यालय के निर्देशों के मुताबिक सभी जरूरी व्यवस्थाएं पहले ही पूरी कर ली गई थीं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों से देर से पहुंचने वाली बहनों को भी उनके भाइयों से मिलने का मौका दिया गया, ताकि कोई भी बहन राखी बांधे बिना वापस न लौटे।






