रक्षाबंधन के मौके पर छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम में भाई-बहन के स्नेह और आस्था की खास तस्वीर देखने को मिली। दरअसल देश के अलग-अलग राज्यों और विदेशों से पहुंची हजारों महिलाओं ने बागेश्वर महाराज धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को अपना भाई मानते हुए उनकी कलाई पर राखी बांधी। पूरे आयोजन के दौरान धाम में उत्सव जैसा माहौल रहा और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।
वहीं बागेश्वर महाराज चबूतरे पर बैठकर लगातार बहनों से राखी बंधवाते रहे। बहनों ने रक्षा सूत्र बांधने के साथ उनकी लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य की कामना की। राखी बांधने के बाद श्रद्धालुओं ने उनका आशीर्वाद लिया। धाम परिसर में सुबह से ही लंबी कतारें लगी रहीं और पूरे क्षेत्र में धार्मिक माहौल बना रहा।
बागेश्वर धाम रक्षाबंधन में देश-विदेश से पहुंचीं हजारों बहनें
दरअसल रक्षाबंधन के इस विशेष आयोजन में मध्य प्रदेश के अलावा उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, दिल्ली, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में महिलाएं पहुंचीं। कई श्रद्धालु ऐसे भी थे जो विदेशों से भारत आकर इस मौके पर बागेश्वर धाम पहुंचे। बहनों का कहना था कि वे वर्षों से इस परंपरा का हिस्सा बन रही हैं और हर बार इसे परिवार जैसा अनुभव मानती हैं। वहीं धाम प्रशासन ने श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रवेश और निकास की विशेष व्यवस्था की थी। सुरक्षा, पेयजल और अन्य सुविधाओं का भी इंतजाम किया गया ताकि बड़ी संख्या में आए लोगों को परेशानी न हो। राखी बांधने के बाद बहनों को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया गया और पूरे आयोजन के दौरान व्यवस्थाएं संभालने के लिए स्वयंसेवक भी तैनात रहे। धार्मिक जयघोषों और भक्ति गीतों के बीच पूरा परिसर आस्था के रंग में रंगा नजर आया।
बागेश्वर महाराज ने दी दक्षिणा और आशीर्वाद
वहीं रक्षा सूत्र बंधवाने के बाद बागेश्वर महाराज ने बहनों को दक्षिणा भेंट की और उन्हें आशीर्वाद दिया। इस परंपरा को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। आयोजन के दौरान बहनों के चेहरों पर उत्साह साफ दिखाई दिया और कई श्रद्धालु इसे भावुक पल बताते नजर आए। धाम में हर वर्ष रक्षाबंधन पर इस तरह का आयोजन होता है, लेकिन इस बार भीड़ पहले से अधिक देखने को मिली। श्रद्धालुओं का मानना है कि यह पर्व केवल पारिवारिक रिश्तों तक सीमित नहीं है, बल्कि विश्वास और आस्था के रिश्तों को भी मजबूत करता है। आयोजन में शामिल महिला भक्त नेहा कुमारी ने भी इसे यादगार अनुभव बताया। पूरे कार्यक्रम के दौरान भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और सम्मान की भावना प्रमुख रूप से दिखाई दी और बागेश्वर धाम का माहौल देर तक उत्सवमय बना रहा।
सौरभ शुक्ला की रिपोर्ट






