जबलपुर की नेताजी सुभाष चंद्र बोस केंद्रीय जेल में रक्षाबंधन पर भावुक माहौल देखने को मिला। दरअसल भारी बारिश के बावजूद 5,106 परिजन बंदियों से मिलने पहुंचे। बहनों ने सलाखों के पीछे भाइयों की कलाई पर राखी बांधी, जबकि जेल प्रशासन ने मिठाई, फल और रक्षासूत्र ले जाने की अनुमति देकर त्योहार को खास बनाने की कोशिश की।
वहीं राखी बांधते समय कई बहनों की आंखें नम हो गईं और कई बंदी भी भावनाओं पर काबू नहीं रख सके। जेल परिसर में कुछ देर के लिए ऐसा माहौल बना, जहां सलाखों के बीच भी रिश्तों की गर्माहट साफ दिखाई दी।
बारिश में भी नहीं टूटा हौसला
दरअसल जेल प्रशासन के मुताबिक केंद्रीय जेल में कुल 2,812 बंदी निरुद्ध हैं। दोपहर 12 बजे तक करीब 600 बंदियों से मिलने के लिए 2,200 से ज्यादा परिजन पहुंच चुके थे। मुलाकात का समय खत्म होने तक कुल 5,106 लोग जेल पहुंचे, जिनमें 3,716 महिलाएं और 1,390 बच्चे शामिल थे। इस दौरान 1,548 पुरुष बंदियों और 22 महिला बंदियों की उनके परिजनों से मुलाकात कराई गई। राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत बंद 16 बंदियों में से तीन को भी दंडाधिकारी के विशेष लिखित आदेश के बाद परिवार से मिलने की अनुमति मिली। प्रशासन ने त्योहार को ध्यान में रखते हुए बहनों को मिठाई, फल, रक्षासूत्र और रुमाल अंदर ले जाने की छूट दी थी। इसी वजह से मुलाकात के दौरान कई परिवार अपने साथ त्योहार की छोटी-छोटी खुशियां भी लेकर पहुंचे। हालांकि बारिश की वजह से जेल के बाहर लंबी कतारें लगी रहीं और कई लोगों को कीचड़ में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा।
स्वास्थ्य सुविधाओं पर रखा गया खास ध्यान
वहीं भारी बारिश को देखते हुए जेल प्रशासन ने परिसर के अंदर और बाहर कुल चार वाटरप्रूफ टेंट लगाए थे। इनमें एक टेंट को आकस्मिक चिकित्सा केंद्र बनाया गया, जहां डॉक्टर, फार्मासिस्ट और पैरामेडिकल स्टाफ की ड्यूटी लगाई गई। बावजूद इसके, अचानक बढ़ी भीड़ के कारण कई जगह इंतजार लंबा हो गया और अस्थायी इंतजाम कम पड़ते दिखाई दिए। कई परिवार छोटे बच्चों को साथ लेकर पहुंचे थे। लगातार बारिश के कारण अधिकांश बच्चे भीग गए, जबकि बंदियों के लिए छाते की व्यवस्था की गई थी। खुली जेल के बाहर भी सुबह नौ बजे से दो छोटे टेंटों में लोगों की लाइन लगनी शुरू हो गई थी। भीड़ बढ़ने पर कतार काफी लंबी हो गई और कई लोग बारिश से बचने के लिए अस्थायी सुलभ केंद्र में बैठे नजर आए।






