जबलपुर की व्हीकल फैक्ट्री (VFJ) में भारतीय सेना के T-72 टैंकों के ओवरहॉल के लिए नई परियोजना शुरू की जा रही है। दरअसल करीब 600 करोड़ रुपये की इस परियोजना का भूमिपूजन आज रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और रक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहेंगे।
दरअसल व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर ने करीब सात महीने पहले पहली बार T-72 टैंक का सफल ओवरहॉल पूरा किया था। इसके बाद रक्षा मंत्रालय ने यहां नियमित ओवरहॉलिंग सुविधा विकसित करने का फैसला लिया। हाल ही में फैक्ट्री दो ओवरहॉल किए गए T-72 टैंक भारतीय सेना को सौंप चुकी है।
T-72 टैंक ओवरहॉल परियोजना में क्या होगा
बता दें कि नई परियोजना शुरू होने के बाद जबलपुर में T-72 टैंकों के ओवरहॉल की क्षमता बढ़ाई जाएगी। अभी भारतीय सेना के मेन बैटल टैंकों का ओवरहॉल मुख्य रूप से आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड (AVNL) की हैवी व्हीकल्स फैक्ट्री, आवड़ी (चेन्नई) में किया जाता है। वहीं T-72 और T-90 टैंकों का निर्माण, मरम्मत और अपग्रेड का काम भी होता है। अप्रैल-मई 2025 में AVNL ने व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर को T-72 टैंकों का पायलट ओवरहॉल करने की अनुमति दी थी। इसके बाद फैक्ट्री ने जरूरी तकनीकी सुविधाएं और इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार किया। सेना के तय मानकों के अनुसार टैंकों की जांच, मरम्मत और पुर्जों के बदलाव की प्रक्रिया पूरी की गई। करीब नौ महीने में पायलट प्रोजेक्ट पूरा हुआ और दो तैयार टैंक भारतीय सेना को सौंपे गए। वहीं टैंक ओवरहॉल की प्रक्रिया में इंजन, ट्रांसमिशन, हथियार प्रणाली, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और अन्य प्रमुख हिस्सों की पूरी जांच की जाती है। जरूरत पड़ने पर खराब या पुराने पुर्जों को बदला जाता है। इसके बाद टैंक को दोबारा तैयार कर तकनीकी और ऑपरेशनल परीक्षण किए जाते हैं।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का जबलपुर दौरा
दरअसल रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आज सुबह गोवा से जबलपुर के डुमना एयरपोर्ट पहुंचेंगे। इसके बाद वे व्हीकल फैक्ट्री जाकर T-72 टैंक ओवरहॉल परियोजना के भूमिपूजन कार्यक्रम में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी पहले डुमना एयरपोर्ट पहुंचकर रक्षा मंत्री की अगवानी करेंगे और फिर उनके साथ व्हीकल फैक्ट्री के कार्यक्रम में शामिल होंगे। कार्यक्रम के बाद दोनों नेता साउथ सिविल लाइंस में आयोजित एक अन्य कार्यक्रम में भी हिस्सा लेंगे। इसके बाद रक्षा मंत्री डुमना एयरपोर्ट से नई दिल्ली के लिए रवाना होंगे, जबकि मुख्यमंत्री भोपाल लौटेंगे।
वहीं T-72 भारतीय सेना का प्रमुख मेन बैटल टैंक है। इसे मूल रूप से सोवियत संघ ने विकसित किया था और भारत में समय-समय पर इसमें तकनीकी सुधार किए गए हैं। इसमें 125 मिमी स्मूथबोर गन और ऑटो-लोडर सिस्टम लगाया गया है, जबकि करीब 780 हॉर्सपावर का इंजन इसे अलग-अलग इलाकों में संचालन की क्षमता देता है। लगातार ओवरहॉल और अपग्रेड के जरिए इन टैंकों को सेना के इस्तेमाल के लिए तैयार रखा जाता है।






