कांग्रेस नेता सोनिया गांधी की किताब ‘Belonging: A Journey of Love’ के भारत में प्रकाशन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया और सोनिया गांधी के बीच पांडुलिपि के कुछ हिस्सों में संपादकीय बदलाव और कुछ अंश हटाने को लेकर मतभेद सामने आए। इसी बीच मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस पूरे मामले पर चिंता जताते हुए इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर खतरा बताया है।
कमलनाथ ने कहा कि “हमारी नेता आदरणीय श्रीमती सोनिया गांधी जी की आत्मकथा के प्रकाशन से प्रकाशक का मना करना अत्यंत चिंता का विषय है।” उन्होंने सवाल किया कि सोनिया गांधी जैसी वरिष्ठ व्यक्ति क्या लिखेंगी और क्या नहीं, यह प्रकाशक कैसे तय कर सकता है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि प्रकाशक स्वयं ऐसा कर रहा है या उस पर किसी का दबाव है।
पांडुलिपि में बदलाव को लेकर शुरू हुआ विवाद
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया की ओर से आत्मकथा के एक हिस्से में कुछ संपादकीय बदलाव और अंश हटाने का सुझाव दिया गया था। सोनिया गांधी ने इन बदलावों को स्वीकार नहीं किया। इसके बाद भारत में पुस्तक के प्रकाशन को लेकर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी।
हार्पर कॉलिन्स के प्रकाशन की चर्चा
पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के भारत में प्रकाशन से अलग होने के बाद हार्पर कॉलिन्स इंडिया के पुस्तक के प्रकाशन और वितरण का जिम्मा लेने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार इस संबंध में अंतिम समझौते की पुष्टि अभी नहीं हुई है।
वहीं, पुस्तक का अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन प्रभावित नहीं बताया जा रहा है। ‘Belonging: A Journey of Love’ का वैश्विक प्रकाशन 10 नवंबर को होना तय है और अमेरिका में इसे Alfred A. Knopf प्रकाशित करेगा। शुरुआती तौर पर इसकी एक लाख प्रतियां छापे जाने की घोषणा की गई थी।
सोनिया गांधी के जीवन और राजनीतिक सफर पर आधारित है किताब
यह आत्मकथा सोनिया गांधी के निजी और राजनीतिक जीवन के अनुभवों पर आधारित है। इसमें इटली में उनके शुरुआती जीवन से लेकर राजीव गांधी से मुलाकात और विवाह, नेहरू-गांधी परिवार में प्रवेश, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की हत्या के बाद के अनुभव तथा भारतीय राजनीति में उनके प्रवेश और भूमिका तक के प्रसंग शामिल होने की जानकारी सामने आई है।
कमलनाथ बोले “अभिव्यक्ति की आजादी के लिए खतरा”
कमलनाथ ने कहा कि इससे पहले भी कुछ महत्वपूर्ण किताबों के प्रकाशन को संदिग्ध परिस्थितियों में रोका गया है। उन्होंने इस तरह की प्रवृत्ति को “अभिव्यक्ति की आजादी के लिए गंभीर खतरा” बताया। कमलनाथ ने मांग की कि सोनिया गांधी की आत्मकथा का प्रकाशन जल्द से जल्द होना चाहिए।






