भोपाल: भगवान श्रीराम की नगरी ओरछा पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यहां से भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े मध्य प्रदेश के धार्मिक स्थलों को लेकर सरकार का बड़ा प्लान बताया। सीएम ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने उज्जैन के सांदीपनि आश्रम में शिक्षा ली थी, अब प्रदेश में उनकी लीलाओं से जुड़े दूसरे स्थानों को भी तीर्थ के रूप में विकसित किया जाएगा। सरकार इन स्थानों को संवारने के साथ नई पीढ़ी को मध्य प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने की तैयारी कर रही है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ओरछा में बन रहे श्री रामराजा लोक के निर्माण कार्यों का जायजा लेने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने प्रदेश के प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों के विकास की बात करते हुए श्रीराम से जुड़े चित्रकूट से लेकर श्रीकृष्ण से जुड़े स्थानों तक का जिक्र किया।
सांदीपनि आश्रम के साथ श्रीकृष्ण की लीलाओं से जुड़े स्थानों पर फोकस
सीएम मोहन यादव ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा उज्जैन के सांदीपनि आश्रम में हुई थी। मध्य प्रदेश में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से जुड़े जो दूसरे स्थान हैं, उन्हें भी तीर्थ के रूप में विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने इसे प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की योजना से जोड़ा। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता इन स्थानों को संरक्षित करने के साथ आने वाली पीढ़ियों को इनके गौरवशाली अतीत से परिचित कराने की भी है।
रामराजा लोक में सहेजी जा रही सदियों पुरानी विरासत
इसी सोच के साथ ओरछा में बन रहे रामराजा लोक में भी पुरानी धरोहरों को बचाते हुए नए काम किए जा रहे हैं। मंदिर परिसर के ऐतिहासिक ‘सावन-भादो’ स्तंभों के मूल स्वरूप से कोई छेड़छाड़ नहीं होगी। रामराजा लोक का निर्माण इस तरह किया जा रहा है कि इन प्राचीन संरचनाओं को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे।
बुंदेलखंड की खास स्थापत्य कला की पहचान माने जाने वाले ये स्तंभ उस दौर की उन्नत निर्माण तकनीक की झलक भी दिखाते हैं। इनके ऐतिहासिक महत्व को बरकरार रखते हुए आसपास के हिस्से को व्यवस्थित और सुंदर बनाया जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं के लिए यहां पहुंचना और आवाजाही भी आसान हो सके।
चित्रकूट से दतिया और पशुपतिनाथ तक होगा विकास
मुख्यमंत्री ने भगवान श्रीराम से जुड़े चित्रकूट का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम ने अपने 14 वर्ष के वनवास का लंबा समय चित्रकूट में बिताया था। सरकार ऐसे धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व वाले स्थानों को उनकी पहचान के अनुरूप विकसित करने पर काम कर रही है। प्रदेश में ओरछा, चित्रकूट, दतिया, नलखेड़ा और मंदसौर के पशुपतिनाथ जैसे प्रमुख तीर्थस्थलों का समग्र विकास किया जा रहा है। इसके साथ मध्य प्रदेश के प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों को आपस में जोड़ने की भी योजना है।
महाकाल लोक के बाद दूसरे तीर्थस्थलों पर फोकस
सीएम यादव ने उज्जैन के श्री महाकाल महालोक का उदाहरण देते हुए कहा कि इसके निर्माण के बाद उज्जैन पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई और इसका असर शहर की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा। सरकार इसी तरह प्रदेश के दूसरे प्रमुख तीर्थस्थलों को विकसित कर धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना चाहती है। इससे इन क्षेत्रों में स्थानीय कारोबार बढ़ने के साथ रोजगार के नए अवसर बनने की भी उम्मीद है।
ओरछा में रामराजा लोक के काम का लिया जायजा
मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन श्री रामराजा लोक में चल रहे काम की प्रगति देखी और अधिकारियों को गुणवत्ता के साथ इसे तय समय में पूरा करने के निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने परिसर में विभिन्न प्रतिष्ठान चलाने वाले लोगों से बातचीत की, उनकी समस्याएं और सुझाव सुने। इसके बाद सीएम जुझार सिंह महल पहुंचे और वहां चल रहे निर्माण एवं जीर्णोद्धार कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने जहांगीर महल का भ्रमण कर यहां की ऐतिहासिक स्थापत्य कला को भी देखा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ओरछा कभी बुंदेला राजाओं की राजधानी के रूप में पहचाना जाता था। यहां के प्राचीन महल और भवन बुंदेलखंड की समृद्ध विरासत हैं। इन्हें संवारते समय उनके पुराने स्वरूप को बरकरार रखने पर जोर है। पुराने भवनों के जीर्णोद्धार में भी उसी तरह की सामग्री इस्तेमाल की जा रही है, जैसी उनके निर्माण के दौर में होती थी।





