जब नल खोलते ही बहने लगी शराब…

जब नल खोलते ही बहने लगी शराब…

हम तो समझे थे कि बरसात में बरसेगी शराब…मय के शौकीनों के लिये ये सबसे हसीन ख्वाब है कि कभी शराब की बारिश हो या नल खोलें तो उसमें से शराब बहने लगे। लेकिन ये तसव्वुर वाकई हकीक़त बन गया जब केरल में लोगों के घर नलों से पानी की बजाय शराब बहने लगी।

ये मामला त्रिसूर ज़िले के चलाकुडी कस्‍बे में बने सोलमन एवेन्यू का है..जहां फ्लेट्स में नल से पानी की जगह शराब आने लगी। बस फिर क्या था, देखते ही देखते ये खबर पूरे इलाके में फैल गई। लोगों ने आसपास के घरों में पता किया तो इस अपार्टमेंट के 17-18 घरों में ऐसा होना पाया गया। इसके बाद रहवासियों ने नगर निगम में शिकायत की।

मामले की जांच करने पर पता चला कि आबकारी विभाग की एक कार्रवाई के कारण ये स्थिति बनी है। दरअसल आबकारी टीम ने करीब पांच हज़ार लीटर शराब ज़ब्त की थी और फिर उसे नष्ट करने के लिये एक गड्ढे में फेंक दिया। ये शराब बहकर पास ही के एक कुएं में जा मिली जहां से सोलमन एवेन्यू में पानी सप्लाई होता था। इस तरह इलाके में लोगों के घर में शराब मिला हुआ पानी आने लगा।

बहरहाल, मामला सामने आने के बाद नगर निगम ने लोगों को साफ पानी मुहैया कराया है और जल्द ही कुएं की सफाई करने का वादा किया है। इस गड़बड़ी से काफी लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा, लेकिन यकीनन कुछ लोग होंगे जिनके लिये ये गड़बड़ी फायदे के सौदे में बदल गई होगी और उन्होने नल खोलकर शराब के कंटेनर भर लिये होंगे।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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