बाढ़ में फंसे इंजीनियर को बचाने गए सरपंच की मौत, उफनती नदी में कार समेत डूबे

बाढ़ में फंसे इंजीनियर को बचाने गए सरपंच की मौत, उफनती नदी में कार समेत डूबे

रायसेन, डेस्क रिपोर्ट। मध्य प्रदेश में लगातार हुई बारिश के कारण कई जिलों में बाढ़ की स्थिति बन गई है। बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित निकाला जा रहा है। इस बीच रायसेन जिले में एक टापू पर इंजीनियर को बचाने गए सरपंच की मौत हो गई। वहीं एनडीआरएफ ने इंजीनियर को सुरक्षित निकाल लिया।

जानकारी के मुताबिक, शनिवार रात को टापू में फंसे इंजीनियर को बचाने जा रहे सरपंच ने उफनती नदी में कार डाल दी। लेकिन वो टापू तक नहीं पहुंच पाया और डूबने से उसकी मौत हो गई। सुबह एनडीआरएफ ने इंजीनियर को सुरक्षित निकाला। घटना शनिवार रात 10:30 बजे की है। जब पिपरिया के पास ग्वालियर का एक इंजीनियर राजीव माने तेंदुनी नदी में बाढ़ आने से फंस गया, जिसे निकालने के लिए सिमरोद निवासी सरपंच दर्शन सिंह धाकड़ ने अपनी कार उफनती नदी में डाल दी। बताया जाता है कि स्थानीय लोगो ने उसे रोका भी, लेकिन वह बोला कि इंजीनियर को बचा लाऊंगा, कहकर अल्टो कार लेकर नदी में चला गया। कुछ ही मिनट में कार समेत सरपंच नदी में बह गया। नदी उफान पर थी। जिससे सरपंच कार समेत नदी डूब गया और उसकी मौत हो गई।

रविवार सुबह एनडीआरएफ की रेस्क्यू टीम ने इंजीनियर को सुरक्षित बचा लिया। वहीं टीम ने बाढ़ के पानी में बही कार को भी रस्सी से बांधकर निकाल लिया। कार के अंदर सरपंच का शव मिला। कार को खींचने के लिए ट्रैक्टर की मदद लेना पड़ी। मृतक सिमरोद निवासी छींद-छुछार के पंचायत सचिव दर्शन सिंह धाकड़ थे।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews