जयपुर लौटने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ को करारा जवाब दिया है। दरअसल केरल में विधानसभा चुनाव प्रचार से लौटकर जयपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत में गहलोत ने राजनीति से रिटायरमेंट के लिए 75 साल वाले बीजेपी के अनौपचारिक नियम पर अपनी बात रखी है। उन्होंने साफ किया है कि यह फॉर्मूला उन पर लागू नहीं होता, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत पर लागू होना चाहिए।

दरअसल गहलोत ने सीधे तौर पर कहा है, “मैं तो कह चुका हूं, ये तो लागू होगा नरेंद्र मोदी पर या क्या नाम है उनका, हमारे आरएसएस के मोहन भागवत, उनके लिए लागू होगा।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि 75 साल का फॉर्मूला बीजेपी की अपनी पार्टी की नीति है, जो कांग्रेस नेताओं पर थोपा नहीं जा सकता है।

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने पहले तंज कसते हुए कहा था कि अशोक गहलोत का राजनीतिक प्रभाव अब खत्म हो चुका है। राठौड़ ने टिप्पणी की थी कि गहलोत का कार्यकाल पूरा हो गया है और अब नई पीढ़ी को आगे आने देना चाहिए। उन्होंने यहां तक कहा था कि, ‘गहलोत जहां गये, वहां उन्होंने पार्टी का नुकसान किया है। अब उन्होंने दिल्ली का रुख किया है और मैं इसके लिए उन्हें शुभकामनाएं देता हूं।’ राठौड़ की इन टिप्पणियों को लेकर गहलोत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

जानिए अशोक गहलोत ने क्या कहा?

पूर्व मुख्यमंत्री ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए महात्मा गांधी का उदाहरण दिया है। उन्होंने कहा है, “गांधीजी ने कहा था 125 साल तक मैं सेवा करना चाहता हूं और इन कट्टरपंथियों ने उनकी हत्या कर दी।” इसी संदर्भ में गहलोत ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है, “मैं तो 100 साल तक सेवा करना चाहता हूं प्रदेशवासियों की, देशवासियों की। तो रिटायरमेंट मेरे लिए लागू नहीं हो सकता है।” गहलोत ने राठौड़ पर सवाल उठाते हुए कहा है कि उन्हें मालूम होगा कि उन्होंने किस संदर्भ में यह बात कही है, लेकिन कांग्रेस के नेताओं को सलाह देने का अधिकार उन्हें नहीं है।

वो कौन होते हैं हमें सलाह देने वाले? :अशोक गहलोत

गहलोत ने बीजेपी नेताओं के काम करने के तरीके पर भी कटाक्ष किया है। उन्होंने कहा है कि बीजेपी नेताओं को ऊपर से जो कहा जाता है, वही लाइन वे ले लेते हैं। उन्होंने राठौड़ पर निशाना साधते हुए कहा है, “वो कौन होते हैं हमें सलाह देने वाले? वो तो पूरी कांग्रेस की राजनीति करने लग गए हैं। वो कांग्रेस नेताओं को कैसे कह सकते हैं कि आपको क्या करना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए?” गहलोत ने कहा है कि राठौड़ उन मुद्दों का जवाब नहीं दे रहे हैं जो कांग्रेस ने उठाए हैं, बल्कि गोलमाल जवाब दे रहे हैं, जिससे उनकी बेइज्जती हो रही है।

राजनीतिक मुद्दों पर गहलोत ने केवल रिटायरमेंट वाले बयान पर ही नहीं, बल्कि राजस्थान विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यक्रम पर भी अपनी राय रखी है। उन्होंने साफ कहा है कि आरएसएस और बीजेपी एक ही विचारधारा के संगठन हैं और दोनों लोकतंत्र के लिए खतरा हैं। गहलोत ने अपनी टिप्पणी में यह भी कहा है कि ये संगठन देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चुनौती पैदा कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “कुछ बड़ा होने वाला है” वाले बयान पर भी गहलोत ने अपनी बात रखी है। उन्होंने इस बयान की तुलना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शैली से की है। गहलोत ने कहा है कि ट्रंप अक्सर इस तरह के बयान देते रहते हैं और खुद मोदी को अपना दोस्त बताते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री के इस बयान को ट्रंप की तरह का एक राजनीतिक पैंतरा बताया है।

इसके अलावा, गहलोत ने केरल में कांग्रेस की मौजूदा स्थिति पर भी बात की है। उन्होंने भरोसा जताया है कि केरल में कांग्रेस मजबूत स्थिति में है और आगामी विधानसभा चुनावों में पार्टी सत्ता में आने के बाद “राइट टू हेल्थ” लागू करने का वादा कर रही है। गहलोत ने यह भी कहा है कि पांच राज्यों में होने वाले चुनावों के लिए कांग्रेस पूरी तरह तैयार है और केरल सहित अन्य राज्यों में पार्टी मजबूत स्थिति में है। उन्होंने पार्टी की जीत का दावा करते हुए अपनी बात खत्म की है।