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भीलवाड़ा में आंधी-बारिश का कहर, BSNL टॉवर गिरने से अस्पताल का गेट ढहा, बड़ा हादसा टला

Written by:Ankita Chourdia
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राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में नौतपा के दौरान तेज आंधी और बारिश ने भारी तबाही मचाई। वहीं इस दौरान BSNL टॉवर धराशायी हो गया और अस्पताल का मुख्य द्वार भी ढह गया, हालांकि राहत की बात है कि कोई जनहानि नहीं हुई।

राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में रविवार को तेज आंधी और बारिश ने भारी तबाही मचाई। दरअसल नौतपा के तीसरे दिन मांडल क्षेत्र में मौसम का मिजाज अचानक बदल गया। भीषण गर्मी से परेशान लोगों को तेज बारिश और ठंडी हवाओं से कुछ देर के लिए राहत मिली। लेकिन, आंधी ने क्षेत्र में भारी नुकसान पहुंचाया। तेज हवाओं के कारण BSNL का एक ऊंचा टॉवर धराशायी हो गया। उप जिला चिकित्सालय का मुख्य प्रवेश द्वार भी दीवारों सहित ढह गया। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। यह एक बड़ा सकारात्मक पहलू था।

दरअसल मांडल उपखंड कार्यालय परिसर में BSNL का यह टॉवर सालों से स्थापित था। तेज हवाओं के दबाव को यह टॉवर झेल नहीं पाया। टॉवर अचानक धराशायी हो गया। यह सीधे महिला एवं बाल विकास विभाग के भवन पर जा गिरा। घटना के समय आसपास लोगों की आवाजाही जारी थी। नजदीकी भोजनालय पर भी कई लोग मौजूद थे। सभी लोग सुरक्षित बच गए। इस तरह एक बड़ा हादसा टल गया। स्थानीय लोगों ने टॉवर के रखरखाव में गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि टॉवर का नियमित तकनीकी निरीक्षण नहीं किया गया था। इस पर ध्यान नहीं दिया गया।

मुख्य गेट और उससे जुड़ी दीवारें अचानक गिर गईं

वहीं तेज आंधी का असर मांडल उप जिला चिकित्सालय में भी साफ दिखाई दिया। अस्पताल का मुख्य गेट और उससे जुड़ी दीवारें अचानक गिर गईं। इससे अस्पताल परिसर में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि, किसी भी व्यक्ति के घायल होने की कोई सूचना नहीं है। घटना के बाद अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। यह घटना सार्वजनिक ढांचों के रखरखाव की स्थिति पर चिंता पैदा करती है। सुरक्षा मानकों का पालन कितना हो रहा है, यह प्रश्न भी उठ रहा है।

विदाई समारोह की तैयारियां चल रही थीं

वहीं, मांडल थाना परिसर में एक विदाई समारोह की तैयारियां चल रही थीं। प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारी आशीष श्रोतरीय का विदाई समारोह होना था। यह तैयारियां भी आंधी की भेंट चढ़ गईं। कार्यक्रम के लिए लगाए गए सभी टेंट, तंबू और अन्य अस्थायी ढांचे क्षतिग्रस्त हो गए। इसके अलावा, क्षेत्र के कई अन्य हिस्सों में भी नुकसान हुआ। कई पेड़ जड़ से उखड़ गए। बिजली आपूर्ति कई घंटों तक बाधित रही। अन्य संपत्तियों को भी भारी नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आई हैं। स्थानीय लोगों को काफी परेशानी हुई।

प्रशासन ने अब नुकसान का आकलन करना शुरू कर दिया है। संबंधित विभागों को मरम्मत कार्य और सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। यह घटना एक बार फिर आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर सवाल खड़ा करती है। सार्वजनिक ढांचों के रखरखाव की व्यवस्था पर भी गंभीरता से ध्यान देने की तत्काल जरूरत है। भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।

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