नाबालिग से रेप के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम की सजा बरक़रार रहेगी, आज बुधवार को राजस्थान हाई कोर्ट की जोधपुर बेंच ने ये फैसला सुनाया, जोधपुर हाई कोर्ट ने आसाराम की अपीलों पर सुनवाई के बाद अपना फैसला सुनाते हुए उसकी सजा बरकरार रखी है, हालांकि न्यायालय ने आसाराम को सामृहिक दुष्कर्म के आरोपों से बरी कर दिया। कोर्ट ने आसाराम को तुरंत प्रभाव से सरेंडर करने का भी आदेश दिया है, आसाराम फिलहाल पैरोल पर जेल से बाहर है और अहमदाबाद में अपना इलाज करवा रहा है।
राजस्थान हाई कोर्ट की जोधपुर स्थित मुख्यपीठ में जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की खंडपीठ ने बुधवार को आसाराम सहित तीन आरोपियों की ओर से दायर अपीलों पर फैसला सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नाबालिग पीड़िता से दुष्कर्म के मामले में निचली अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया जाएगा।
आसाराम को सरेंडर करना होगा
बता दें जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेन्द्र कुमार पुरोहित की खंडपीठ ने करीब एक महीने पहले फैसला सुरक्षित रख लिया था जिसे आज बुधवार को बेंच ने सुनाया, कोर्ट ने साफ किया कि ट्रायल कोर्ट का फैसला सही था और इसमें हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है, हालांकि मामले में सह-आरोपी शिल्पी और शरतचंद को साक्ष्यों के अभाव में अदालत ने बरी कर दिया, फिलहाल अंतरिम जमानत पर चल रहे आसाराम को अब कोर्ट के आदेश के अनुसार सरेंडर करना होगा।
चर्चा का विषय रहा है ये मामला
उल्लेखनीय है कि मामला अगस्त 2013 का है उस समय आसाराम पर जोधपुर के आश्रम में एक नाबालिग छात्रा के साथ दुष्कर्म का आरोप लगा था, मामला अदालत पहुंचा और फिर लंबी सुनवाई के बाद 25 अप्रैल 2018 को विशेष पॉक्सो कोर्ट ने आसाराम को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी, आसाराम जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद था, उसने सजा के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की थी बीते दिनों आसाराम इलाज के लिए पैरोल पर बाहर आ गया था जोधपुर हाई कोर्ट में 16 फरवरी से 20 अप्रैल 2026 तक आसाराम मामले की लगातार सुनवाई हुई उसके बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे आज अदालत ने सुना दिया और आसाराम की उम्रकैद किस अज को बरक़रार रखा।






