भारत और अमेरिका के बीच हुए नए व्यापार समझौते (ट्रेड डील) की गूंज आज राजस्थान विधानसभा में भी सुनाई दी। इस मुद्दे पर कांग्रेस विधायकों ने सदन के अंदर और बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली की अगुवाई में हुए इस विरोध प्रदर्शन में केंद्र सरकार पर देश के हितों के साथ समझौता करने के गंभीर आरोप लगाए गए।
मंगलवार सुबह कांग्रेस विधायक पहले विधायक आवास पर एकत्र हुए और वहां से नारेबाजी करते हुए विधानसभा परिसर की ओर बढ़े। उनके हाथों में बैनर और पोस्टर थे, जिन पर ट्रेड डील के विरोध में नारे लिखे हुए थे। विधायकों ने इस समझौते को किसानों, छोटे व्यापारियों और स्थानीय उद्योगों के लिए खतरनाक बताया।
विधानसभा परिसर में गूंजे नारे
जैसे ही विधायक विधानसभा परिसर में पहुंचे, उन्होंने सीढ़ियों और कॉरिडोर में जमा होकर सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। इस प्रदर्शन के कारण कुछ देर के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया और सदन की कार्यवाही भी प्रभावित हुई। सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली, जिससे सदन में हंगामे जैसी स्थिति बन गई।
टीकाराम जूली ने सरकार को घेरा
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह फैसला संसद और राज्यों को विश्वास में लिए बिना लिया गया है, जो संघीय ढांचे के खिलाफ है।
“केंद्र की मोदी सरकार ने अमेरिका के सामने देश के हितों से समझौता कर लिया है। यह ट्रेड डील देश के किसानों, छोटे व्यापारियों और उद्योगों के हित में बिल्कुल नहीं है।” — टीकाराम जूली, नेता प्रतिपक्ष
कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि इस डील से देश के स्थानीय उद्योगों पर बुरा असर पड़ेगा और बेरोजगारी की समस्या और भी गंभीर हो सकती है। उन्होंने इसे जल्दबाजी में लिया गया एकतरफा फैसला करार दिया।
सत्ता पक्ष ने आरोपों को बताया निराधार
वहीं, सत्ता पक्ष ने कांग्रेस के इन सभी आरोपों को राजनीति से प्रेरित और निराधार बताया है। सरकार का कहना है कि यह व्यापार समझौता देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए किया गया है। फिलहाल, यह मुद्दा राजस्थान की राजनीति में गरमा गया है और आने वाले दिनों में इस पर और तीखी बहस होने की पूरी संभावना है।






