राजस्थान की राजधानी जयपुर में दो विधायकों के बीच चल रहा विवाद अब ‘डिग्री’ और ‘धर्म’ की बहस तक पहुंच गया है। कांग्रेस विधायक अमीन कागजी के एक सवाल पर हवामहल से बीजेपी विधायक बालमुकुंद आचार्य इस कदर भड़क गए कि उन्होंने कागजी को ‘मदरसा छाप’ तक कह दिया। यह विवाद एक निर्माण कार्य को लेकर शुरू हुआ था, लेकिन अब व्यक्तिगत आरोपों का रूप ले चुका है।
कांग्रेस विधायक अमीन कागजी ने बालमुकुंद आचार्य की शैक्षणिक योग्यता पर सवाल उठाते हुए पूछा था कि वे बिना किसी डिग्री के अपने नाम के आगे ‘आचार्य’ कैसे लगाते हैं। कागजी ने दावा किया कि बीजेपी विधायक के पास ऐसी कोई डिग्री नहीं है।
‘यह यूनिवर्सिटी नहीं, सनातन परंपरा है’
अमीन कागजी के सवाल पर बालमुकुंद आचार्य ने तीखी प्रतिक्रिया दी और अपनी उपाधि का स्रोत बताया। उन्होंने कहा कि उनका ‘आचार्य’ टाइटल किसी यूनिवर्सिटी की देन नहीं, बल्कि उनकी धार्मिक और वंशानुगत परंपरा का हिस्सा है।
“मैं रामानुज संप्रदाय के बालाजी धाम का पुजारी हूं, सेवक हूं और कथाएं करता हूं। हमारी परंपरा के अनुसार हम आचार्य परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं। मेरे यहां सनातन संस्कृति धर्म वाहक सत्संग के अनुष्ठान करते हैं। व्यास पीठ पर बैठते हैं। उसे व्यासपीठ भी बोलते हैं, आचार्य पीठ भी बोलते हैं।” — बालमुकुंद आचार्य, विधायक
उन्होंने आगे स्पष्ट किया, “हमारे दो पद होते हैं- एक स्वामी और दूसरा आचार्य। मेरा पद स्वामी है, क्योंकि मैं हाथोज मंदिर का सेवादार हूं। मेरा नाम बालमुकुंद आचार्य है। आचार्य अलग से नहीं है, मेरे नाम में सम्मिलित है। 35 साल से मंदिर में सेवा कर रहा हूं। पीढ़ियों से हम यह काम कर रहे हैं।”
‘मदरसा छाप हैं, भविष्य जानने मेरे पास आते थे’
बालमुकुंद आचार्य ने अमीन कागजी पर सीधा हमला बोलते हुए एक बड़ा दावा भी किया। उन्होंने कहा, “जो मेरे आचार्य होने पर सवाल उठा रहे हैं, वो मेरे पास अपना भविष्य जानने आया करते थे। वो मदरसा छाप हैं। जो मेरी सनातन संस्कृति के बारे में नहीं जानता उसे सवाल करने का अधिकार नहीं है।”
बीजेपी विधायक ने इसे कांग्रेस की विचारधारा से जोड़ते हुए कहा, “उनकी समझ में केवल मदरसा आना है, वही आएगा। सनातन संस्कृति का अपमान करना कांग्रेस का लगातार स्वभाव रहा है। वो मेरा अपमान करें, सनातन का अपमान करें, तिलक का अपमान करें, मुझे जान से मारने की धमकी दें, अवैध मस्जिद बनाना चाहें और मैं बोलूं नहीं, यह तो संभव नहीं है।”






