रविवार को अररिया सड़क पर राहुल गांधी की अगुवानी में ‘वोटर अधिकार यात्रा’ देखने को मिली, जिसमें सीमांचल के लोग उत्साह और जोश के साथ शामिल हुए। इससे एक दिन पहले कटिहार में भी इसी तरह का उत्साह देखने को मिला था। रूक-रूक कर बारिश होती रही, लेकिन लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ। सीमांचल के लोग, जिनमें लगभग 49 प्रतिशत मुसलमान हैं, राहुल गांधी की बातों और उनकी अगुवानी को बेहद सराह रहे थे।
सीमांचल के मतदाता और विशेष चिंता
कटिहार, पूर्णिया, अररिया और किशनगंज मिलकर सीमांचल का क्षेत्र बनाते हैं। इस क्षेत्र के लोग मतदाता-सूची में घुसपैठियों के होने की आशंका को गंभीरता से देख रहे हैं। इसी वजह से राहुल गांधी की SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) और मतदाता अधिकारों पर बातें लोगों को बहुत पसंद आईं। कटिहार में मोंगरा बस्ती के शम्सुल होदा, पूर्णिया में कसबा के शेख यासिर और अररिया में चांदनी चौक के मोहम्मद हफीजुर्रहमान जैसे लोग भाजपा से नाराज हैं और राहुल गांधी को दिल से पसंद कर रहे हैं।
यात्रा के दौरान राहुल का उत्साह
कटिहार में राहुल मखाने के पानी भरे खेत में उतर गए, वहीं पूर्णिया में उन्होंने बाइक से शहर में घूमते हुए लोगों का उत्साह बढ़ाया। अररिया में तो ऐसा जोश था कि राहुल ढाबे पर चाय-पानी पीकर भीड़ के बीच बैठ गए। इसके बाद शहर में प्रेस-वार्ता कर यात्रा के दूसरे चरण को पूरा किया और दिल्ली के लिए रवाना हुए। यह यात्रा सीमांचल के लोगों के लिए खास रही और उन्होंने राहुल गांधी को पिछले भारत जोड़ो न्याय यात्रा से भी अधिक उत्साह के साथ स्वागत किया।
सीमांचल में कांग्रेस का प्रभाव
बिहार से कांग्रेस के तीन सांसदों में दो सीमांचल से हैं। किशनगंज ने कांग्रेस का साथ 2019 में भी दिया था, जब महागठबंधन की एकमात्र जीत यही रही। विधानसभा के पिछले दो चुनावों में भी सीमांचल ने कांग्रेस और महागठबंधन को समर्थन दिया। 2020 में जब राजद को इस क्षेत्र में केवल एक सीट मिली, तब सीमांचल ने कांग्रेस के खाते में पांच सीटें डालीं। इस क्षेत्र की कुल विधायकों में लगभग एक चौथाई की हिस्सेदारी सीमांचल से ही रही।
सीमांचल के लोगों का उत्साह और सवाल
पूर्णिया के सुरेश दुबे का कहना है कि सीमांचल के लोग राहुल गांधी की मेहनत और यात्रा के दौरान दिखाए गए प्रेम को देखकर खुश हैं। लोग अब भी उत्साहित हैं और उनका मानना है कि सीमांचल का प्यार और राहुल गांधी के मनुहार पर किसी को शक नहीं होना चाहिए। हालांकि कुछ लोग जैसे अररिया के मायानंद पासवान इसे केवल दिखावे की भीड़ मानते हैं, लेकिन सीमांचल के मतदाता इतिहास से यह साबित कर चुके हैं कि उनका समर्थन स्थायी और गंभीर है।





