जयपुर: राजस्थान विधानसभा में प्रेम विवाह और लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। आहोर से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के विधायक छगन सिंह राजपुरोहित ने सदन में युवाओं के घर से भागकर शादी करने के चलन पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने सरकार से मांग की है कि 18 से 25 साल के युवक-युवतियों के लिए ऐसे संबंधों में माता-पिता की सहमति को अनिवार्य बनाया जाए।
शून्य काल के दौरान पर्ची के माध्यम से इस मुद्दे को उठाते हुए विधायक ने कहा कि यह प्रवृत्ति न केवल सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचा रही है, बल्कि भारतीय संस्कृति पर भी सीधा प्रहार है। उन्होंने इसे आज के समय में माता-पिता के लिए एक बहुत बड़ी समस्या बताया।
‘परिवारों को पहुंच रहा गहरा आघात’
विधायक राजपुरोहित ने सदन में कुछ गंभीर मामलों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं, जहां परिवार वाले अपनी बेटी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराते हैं।
“लेकिन जब पुलिस लड़की को ढूंढकर थाने लाती है, तो वह अपने ही माता-पिता को पहचानने से इनकार कर देती है। इससे परिवारों को गहरा आघात पहुंचता है और वे टूट जाते हैं।”- छगन सिंह राजपुरोहित, विधायक, आहोर
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इस तरह की घटनाओं के डर से कई अभिभावक असुरक्षित महसूस करते हैं। कुछ मामलों में तो वे अपने बच्चों, खासकर लड़कियों की पढ़ाई बीच में ही छुड़वा देते हैं, ताकि वे घर से बाहर न जा सकें।
कानून बनाने का प्रस्ताव क्यों?
बीजेपी विधायक ने तर्क दिया कि कम उम्र में लिए गए ऐसे भावनात्मक निर्णय अक्सर युवाओं के भविष्य के लिए हानिकारक साबित होते हैं। उन्होंने कहा कि कई युवा स्कूल या कॉलेज की पढ़ाई बीच में ही छोड़ देते हैं, जिससे उनका करियर प्रभावित होता है।
विधायक ने सरकार के सामने यह प्रस्ताव रखा:
“18 से 25 वर्ष की आयु के युवक-युवतियों द्वारा किए जाने वाले प्रेम विवाह और लिव-इन रिलेशनशिप के लिए माता-पिता की अनिवार्य अनुमति से संबंधित कानून पर विचार किया जाना चाहिए।”
उनका मानना है कि इस तरह का अधिनियम बनाने से पहले व्यापक विचार-विमर्श होना चाहिए। एक ऐसा कानून बने जो अभिभावकों की भूमिका को मजबूत करे और समाज में पारिवारिक मूल्यों का संरक्षण सुनिश्चित कर सके। उन्होंने कहा कि इससे सामाजिक और कानूनी जटिलताओं को कम करने में भी मदद मिलेगी।






