राजस्थान के तीन ऐतिहासिक शहरों की पहचान अब बदल गई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने विधानसभा में एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए प्रदेश के तीन शहरों के नाम बदलने का ऐलान किया। इस फैसले के तहत, राज्य के एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू को अब ‘आबूराज’ के नाम से जाना जाएगा।
इसके अलावा भीलवाड़ा जिले के ऐतिहासिक कस्बे जहाजपुर का नाम बदलकर ‘यज्ञपुर’ कर दिया गया है। वहीं, ब्रज क्षेत्र की संस्कृति से जुड़े डीग जिले के कामां को अब ‘कामवन’ के रूप में नई पहचान मिली है। यह फैसला स्थानीय लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग और इन स्थानों के सांस्कृतिक व ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए लिया गया है।
स्थानीय मांग और सांस्कृतिक विरासत का सम्मान
सरकार के अनुसार, इन नामों का परिवर्तन केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह इन क्षेत्रों की गहरी सांस्कृतिक जड़ों और ऐतिहासिक विरासत को सम्मान देने का एक प्रयास है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बजट पर चर्चा के दौरान कहा कि यह निर्णय स्थानीय नागरिकों की भावनाओं, ऐतिहासिक तथ्यों और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया है।
- माउंट आबू (आबूराज): सिरोही जिले में स्थित यह प्रसिद्ध पर्यटन स्थल देश-विदेश के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है। ‘आबूराज’ नाम इसके प्राचीन गौरव को दर्शाता है।
- जहाजपुर (यज्ञपुर): भीलवाड़ा का यह कस्बा अपनी प्राचीन धार्मिक परंपराओं के लिए जाना जाता है। नया नाम इसकी आध्यात्मिक पहचान को और पुख्ता करेगा।
- कामां (कामवन): डीग जिले का यह क्षेत्र ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसका संबंध भगवान कृष्ण से माना जाता है।
इस फैसले के बाद संबंधित शहरों में खुशी का माहौल है। कई स्थानीय संगठनों और निवासियों ने इसे अपनी पहचान की पुनर्स्थापना बताते हुए सरकार के कदम का स्वागत किया है। उन्होंने इसे एक ‘ऐतिहासिक भूल सुधार’ करार दिया है।
फैसले पर सियासत, विपक्ष ने उठाए विकास के मुद्दे
हालांकि, सरकार के इस फैसले पर राजनीतिक बहस भी शुरू हो गई है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने नाम बदलने की प्राथमिकता पर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस ने सीधे तौर पर नाम बदलने का विरोध तो नहीं किया, लेकिन सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं।
“नाम बदलने से ज्यादा जरूरी इन शहरों में सड़क, पानी, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना है। सरकार असल मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे फैसले ले रही है।” — स्वर्णिम चतुर्वेदी, महासचिव, राजस्थान कांग्रेस
विपक्ष का आरोप है कि सरकार विकास के मुख्य एजेंडे से हटकर भावनात्मक मुद्दों को तूल दे रही है। फिलहाल, इस फैसले ने प्रदेश की सियासत में एक नई चर्चा छेड़ दी है और अब सभी की निगाहें आधिकारिक अधिसूचना जारी होने पर टिकी हैं, जिसके बाद यह परिवर्तन कानूनी रूप से लागू हो जाएगा।






