राजस्थान हाईकोर्ट ने नाबालिग से यौन शोषण मामले में दोषी ठहराए गए आसाराम और अन्य सह-आरोपियों की लंबित अपीलों पर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायाधीश अरुण मोंगा और न्यायाधीश योगेंद्र कुमार पुरोहित की डिवीजन बेंच ने आदेश दिया है कि 16 फरवरी से इन याचिकाओं पर डे-टू-डे यानी नियमित सुनवाई शुरू की जाएगी और किसी भी परिस्थिति में स्थगन नहीं दिया जाएगा।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि ये अपीलें उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुसार समयबद्ध श्रेणी में आती हैं, इसलिए इनका निस्तारण प्राथमिकता के आधार पर किया जाना अनिवार्य है। वर्तमान में आसाराम उपचार के लिए अंतरिम जमानत पर बाहर हैं, जो राजस्थान हाईकोर्ट ने उन्हें दी थी।
सुनवाई का समय निर्धारित
कोर्ट ने याचिकाओं की सुनवाई का समय भी तय कर दिया है। अब प्रतिदिन दोपहर 2 बजे या दिन की सुनवाई के अंत में (जो भी पहले हो) इन मामलों पर कार्यवाही होगी। यह प्रक्रिया तब तक लगातार जारी रहेगी जब तक सभी पक्षों की बहस पूरी नहीं हो जाती।
इस सुनवाई में आसाराम की सजा स्थगन याचिका, सह-आरोपी शरद चंद्र की अपील और अन्य संबंधित याचिकाओं पर विचार किया जाएगा। इससे पहले आसाराम की ओर से स्वास्थ्य समस्याओं और अन्य आधारों पर कई बार राहत की मांग की जा चुकी है।
2013 का वह मामला
14 अगस्त 2013 को घटित इस घटना में आसाराम के गुरुकुल की एक नाबालिग छात्रा के माता-पिता उसे जोधपुर के मणाई आश्रम में लेकर पहुंचे थे। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा आश्रम में छात्रा अचानक बेहोश होकर गिर गई थी, जिसके बाद आसाराम की अनुयायी शिल्पी ने माता-पिता को बताया कि छात्रा पर भूत-प्रेत का साया है।
शाहजहांपुर (उत्तर प्रदेश) निवासी माता-पिता को जब जानकारी मिली कि आसाराम जोधपुर के मणाई आश्रम में हैं, तो वे छात्रा को लेकर वहां पहुंचे। आसाराम के कहने पर छात्रा को उनकी कुटिया में भेजा गया, जबकि माता-पिता बाहर जाप करने बैठ गए। आरोप है कि कुटिया में आसाराम ने छात्रा के साथ अश्लीलता की और उसे धमकाते हुए किसी को न बताने की हिदायत दी।
एफआईआर से सजा तक का सफर
घटना की एफआईआर 19 अगस्त 2013 को दिल्ली के कमला नगर थाने में दर्ज की गई थी। पीड़िता का तुरंत मेडिकल परीक्षण कराया गया और उसे मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया। 2013 से आसाराम जोधपुर की सेंट्रल जेल में बंद रहे और 2018 में उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। इसके अलावा गुजरात में भी यौन उत्पीड़न के एक अन्य मामले में उन्हें आजीवन कारावास की सजा मिली।
जमानत के लगातार प्रयास
आसाराम जेल से बाहर आने के लिए कई बार प्रयास कर चुके हैं। 7 जनवरी 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात केस में 3 माह की अंतरिम जमानत मंजूर की, जिसके बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने भी उन्हीं शर्तों पर 3 माह की अंतरिम जमानत दी। अंतरिम जमानत पूरी होने पर उन्होंने सेंट्रल जेल में सरेंडर किया।
7 अप्रैल 2025 को अंतरिम जमानत को 3 माह तक बढ़ाया गया। 1 जुलाई को जमानत पूरी होने पर सरेंडर करना था, लेकिन राजस्थान हाईकोर्ट ने 9 जुलाई तक इसे आगे बढ़ाया। गुजरात हाईकोर्ट ने भी अंतरिम जमानत को एक माह बढ़ाया, जिसके बाद राजस्थान हाईकोर्ट में 8 जुलाई को सुनवाई के बाद आसाराम को उपचार के लिए 12 अगस्त 2025 तक अंतरिम जमानत दी गई। वर्तमान में वे लगातार उपचार के आधार पर जमानत पर बाहर हैं।
राजस्थान हाईकोर्ट के इस सख्त आदेश के बाद अब अंतिम दौर की बहस का रास्ता साफ हो गया है और आसाराम व सह-आरोपियों की कानूनी चुनौतियों पर निर्णायक सुनवाई होने की उम्मीद है।





