मध्य-पूर्व में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर निशाना साधा है। राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार की विदेश नीति ‘व्यक्ति आधारित’ हो गई है, जबकि इसे राष्ट्र के हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि व्यक्तिगत छवि बनाने के लिए राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं किया जा सकता।
सचिन पायलट ने विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा के समय पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि इस यात्रा और वहां दिए गए भाषण से भारत की पारंपरिक निष्पक्षता पर संदेह पैदा होता है।
‘विदेश नीति से हो रहा समझौता’
कांग्रेस नेता ने भारत की लंबे समय से चली आ रही विदेश नीति के सिद्धांतों से विचलन का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भारत ने हमेशा दो-राष्ट्र सिद्धांत का समर्थन किया है, लेकिन हाल के दिनों में इस रुख में बदलाव दिख रहा है।
“मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री मोदी की इजरायल यात्रा की टाइमिंग सही नहीं थी। उन्होंने जो भाषण दिया उससे कहीं न कहीं भारत की एक जो निष्पक्षता है उस पर संदेह हो जाता है। हमने हमेशा दो-राष्ट्र सिद्धांत का समर्थन किया है और इस बार हम कहीं न कहीं अपनी विदेश नीति से कुछ हद तक समझौता कर रहे हैं।” — सचिन पायलट
पायलट ने स्पष्ट किया कि विदेश नीति का उद्देश्य देश के हितों की रक्षा करना होता है, न कि किसी व्यक्ति विशेष की छवि को चमकाना।
‘व्यक्तिगत रिश्तों पर आधारित हो गई नीति’
उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत की विदेश नीति दुर्भाग्य से व्यक्ति-केंद्रित हो गई है।
सचिन पायलट ने कहा, “विदेश नीति राष्ट्र के हितों को देखकर बनाई जाती है, वो व्यक्तिगत छवि बनाने का माध्यम नहीं होता है। दुर्भाग्य से पिछले 10-11 साल से जो विदेश नीति बनी है वो व्यक्ति आधारित हो गई है। व्यक्तिगत रिश्तों को लेकर अगर विदेश नीति बनेगी तो इससे देश के हितों को नुकसान होगा।” उन्होंने इस तरह के किसी भी समझौते का कड़ा विरोध करने की बात कही।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायल ने ईरान के कई ठिकानों पर कथित तौर पर हमला किया है, जिससे मध्य-पूर्व में एक बड़े सैन्य टकराव की आशंका बढ़ गई है।






