हादसा : ट्रक की टक्कर से मामा-भांजे की दर्दनाक मौत, दो थाना प्रभारियों ने दिखाई मानवीयता

हादसा : ट्रक की टक्कर से मामा-भांजे की दर्दनाक मौत, दो थाना प्रभारियों ने दिखाई मानवीयता

राजगढ़, डेस्क रिपोर्ट| मध्यप्रदेश (Madhya pradesh) के राजगढ़ (Rajgarh) जिले के ब्यावरा (Biaora) सिटी थाना क्षेत्र के अरनियां चौकी के पास एक दर्दनाक हादसा हुआ। जयपुर-जबलपुर हाईवे (Jaipur-Jabalpur Highway) पर तेज रफ्तार से आ रहे ट्रक ने मोटरसाइकिल को जोरदार टक्कर मार दी| हादसे में बाइक सवार मामा-भांजे की मौके पर ही मौत हो गई।

ब्यावरा सिटी थाना प्रभारी राजपाल सिंह राठौर ने बताया कि कालीपीठ निवासी कुलदीप दांगी और ढकोरा निवासी महेश पिता शंकर लाल दांगी कालीपीठ से ढकोरा में शादी समारोह में भाग लेने जा रहे थे, इसी बीच अरनियां चौकी के पास तेज रफ्तार से आ रहे ट्रक क्रमांक यूपी 75 एम 9963 के चालक ने तेज गति व लाफरवाही से ट्रक चलाते हुए टक्कर मार दी। इस हादसे में दोनों की मौके पर ही मौत हो गई । दोनों मृतक रिश्ते में मामा भांजे है।

दोनों थाना प्रभारियों ने शव उठाकर पीएम के लिए भेजें
हादसे के बाद घटनास्थल पर बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुट गई लेकिन हाईवे से शवों को उठाने के लिए कोई तैयार नहीं हुआ। मृतकों के परिजन शव देखकर रो रहे थे, इसी बीच ब्यावरा सिटी थाना प्रभारी राजपाल सिंह राठौर और ब्यावरा देहात थाना प्रभारी आदित्य सोनी पहुंचे और दोनों थाना प्रभारियों ने मानवीयता दिखाते हुए अपना फर्ज निभाया और ग्रामीणों की मदद से दोनों ने शवों को पुलिस वाहन में रखकर पीएम के लिए ब्यावरा के सिविल अस्पताल भिजवाया|

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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