रतलाम। सुशील खरे।
विधानसभा मे नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव से मिलने वीर सावरकर मंच के लोग आए। उन्होंने बोला हमने सावरकर के फोटो लगाकर रजिस्टर स्कूलों में दिए तो प्राचार्य का निलंबन कर दिया। इस गलत करवाई के विरोध में स्कूली बच्चें भी सड़क पर उतरे। भार्गव ने अधिकारियों के बारे में सवाल किया तो सांसद गुमानसिंह डामोर, ग्रामीण विधायक दिलीप मकवाना आदि ने बताया अपनी सरकार के समय के अधिकारी है तो भार्गव ने बोला अधिकारी तो वेश्याओं की तरह कपड़े बदलते है।किसी भी दिन निजाम बदल जाएगे। दो मिनट में हाईकोर्ट से स्टे दिलवा देंगे।
VIDEO: नेता प्रतिपक्ष का विवादित बयान-“हाईकोर्ट से दो मिनिट मे स्टे दिला देगे”
Written by:Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है।
इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →






