अक्सर हम देखते हैं कि कुछ लोग हर परिस्थिति में बेखौफ रहते हैं। मुश्किलें आएं तो भी वे पीछे नहीं हटते। वहीं कुछ लोग पढ़ाई में बेहद तेज होते हैं, तुरंत जवाब दे देते हैं और जटिल बातें भी आसानी से समझ लेते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इन गुणों के पीछे केवल परवरिश या माहौल ही नहीं, बल्कि कुंडली में ग्रहों की स्थिति भी अहम भूमिका निभाती है।
भारतीय ज्योतिष में नौ ग्रहों को जीवन की दिशा तय करने वाला माना गया है। कुंडली में कौन सा ग्रह बनाता है निडर और कौन देता है तेज दिमाग, इसका जवाब मुख्य रूप से मंगल और बुध ग्रह में छिपा है। जब ये दोनों ग्रह मजबूत स्थिति में होते हैं तो व्यक्ति के स्वभाव और सोच पर गहरा प्रभाव डालते हैं।
मंगल ग्रह और निडर स्वभाव का संबंध
ज्योतिष शास्त्र में मंगल को साहस, पराक्रम और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि कुंडली में मंगल की स्थिति को बहुत ध्यान से देखा जाता है। जब किसी व्यक्ति की कुंडली में मंगल मजबूत होता है, तो वह व्यक्ति डरपोक नहीं होता। वह जोखिम लेने से नहीं घबराता और कठिन हालात में भी डटा रहता है।
ऐसे लोगों में आत्मविश्वास साफ दिखाई देता है। वे जल्दी हार नहीं मानते। खेल, सेना, पुलिस, तकनीकी क्षेत्र या ऐसे काम जिनमें हिम्मत और निर्णय क्षमता की जरूरत होती है, वहां मजबूत मंगल वाले लोग अक्सर आगे दिखाई देते हैं। कुंडली में मंगल अगर सही भाव में बैठा हो और शुभ दृष्टि में हो तो व्यक्ति में नेतृत्व की क्षमता भी विकसित होती है।
हालांकि मंगल का प्रभाव संतुलित होना जरूरी है। यदि मंगल अशुभ स्थिति में हो तो व्यक्ति में गुस्सा ज्यादा हो सकता है या वह जल्दबाजी में फैसले ले सकता है। इसलिए ज्योतिष में कहा जाता है कि निडरता के साथ संयम भी जरूरी है।
बुध ग्रह और तेज दिमाग का रहस्य
जब सवाल उठता है कि कुंडली में कौन देता है तेज दिमाग, तो ज्योतिष शास्त्र में इसका उत्तर बुध ग्रह से जुड़ा हुआ है। बुध को बुद्धि, तर्क और वाणी का स्वामी माना गया है। यह ग्रह व्यक्ति की सोचने की क्षमता, समझदारी और बोलने की शैली को प्रभावित करता है।
अगर कुंडली में बुध मजबूत स्थिति में हो तो व्यक्ति जल्दी सीखता है। उसे गणित, लेखन या बातचीत में आसानी होती है। वह अपनी बात स्पष्ट रूप से रख पाता है और सामने वाले को प्रभावित कर सकता है। ऐसे लोग व्यापार, शिक्षा, लेखन, पत्रकारिता और मीडिया जैसे क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर सकते हैं।
बुध का सीधा संबंध दिमाग की सक्रियता से माना जाता है। इसलिए जब कुंडली में बुध शुभ होता है तो व्यक्ति की याददाश्त और विश्लेषण करने की क्षमता भी बेहतर होती है। वहीं यदि बुध कमजोर हो तो व्यक्ति निर्णय लेने में उलझ सकता है या अपनी बात सही तरीके से व्यक्त करने में कठिनाई महसूस कर सकता है।
क्या केवल मंगल और बुध ही जिम्मेदार हैं?
हालांकि निडरता के लिए मंगल और तेज दिमाग के लिए बुध को मुख्य ग्रह माना जाता है, लेकिन पूरी कुंडली का विश्लेषण जरूरी होता है। सूर्य आत्मविश्वास और नेतृत्व का प्रतीक है। चंद्रमा मन और भावनाओं को नियंत्रित करता है। गुरु ज्ञान और समझ का विस्तार करता है। शनि व्यक्ति को अनुशासन और धैर्य सिखाता है।
ज्योतिष के अनुसार ग्रह अकेले काम नहीं करते, बल्कि एक-दूसरे के साथ मिलकर प्रभाव डालते हैं। इसलिए यह कहना कि केवल एक ग्रह सब कुछ तय करता है, पूरी तरह सही नहीं होगा। कुंडली में ग्रह किस भाव में है, किसके साथ बैठा है और उस पर किसकी दृष्टि है, यह सब भी मायने रखता है।
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