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छठ पूजा पर क्यों लगाती हैं महिलाएं नाक से मांग तक सिंदूर? जानें इसके पीछे का महत्व

Written by:Bhawna Choubey
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छठ पूजा और सुहाग का गहरा रिश्ता जानें क्यों इस दिन महिलाएं मांग से लेकर नाक तक लगाती हैं सिंदूर, और कैसे यह जुड़ा है पति की लंबी आयु और परिवार की समृद्धि से।
छठ पूजा पर क्यों लगाती हैं महिलाएं नाक से मांग तक सिंदूर? जानें इसके पीछे का महत्व

छठ पूजा (Chhath Puja) सिर्फ एक व्रत नहीं, बल्कि आस्था, त्याग और परिवार के प्रति समर्पण का प्रतीक है। यह त्योहार हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है और इसमें सूर्य देव और छठी मैया की पूजा की जाती है। चार दिनों तक चलने वाला यह पर्व भक्तों के लिए एक आध्यात्मिक यात्रा है, जिसमें डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देकर सुख-समृद्धि, संतान की दीर्घायु और पारिवारिक कल्याण की कामना की जाती है।

इस दौरान महिलाओं का सिंदूर से सजा माथा, रंगीन साड़ियाँ और व्रत का दृढ़ संकल्प, सब कुछ मिलकर इस पर्व को सुहाग और श्रद्धा का उत्सव बना देता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि छठ पूजा पर महिलाएं नाक से मांग तक सिंदूर क्यों लगाती हैं? आइए जानते हैं इस परंपरा के पीछे की धार्मिक और भावनात्मक कहानी।

नाक से मांग तक सिंदूर लगाने की परंपरा

हिंदू धर्म में सिंदूर को सुहाग का प्रतीक माना गया है। सामान्य दिनों में महिलाएं सिर्फ मांग में सिंदूर भरती हैं, लेकिन छठ पूजा के दिन इसे नाक तक लगाया जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह दिन पति की लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की समृद्धि के लिए समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, नाक से मांग तक सिंदूर लगाना एक तरह की ‘संरक्षक रेखा’ होती है, जो पति और परिवार को नकारात्मक ऊर्जाओं से बचाती है। कहा जाता है कि जितना लंबा सिंदूर लगाया जाए, उतनी ही लंबी पति की आयु होती है।

छठ पर्व और सूर्य उपासना का संबंध

छठ पूजा में महिलाएं सूरज की उपासना करती हैं, डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर दुखों का अंत और उगते सूर्य को अर्घ्य देकर नई शुरुआत की कामना करती हैं। सूर्य देव को जीवनदाता कहा गया है और छठी मैया उनके उर्जा रूप में पूजी जाती हैं। ऐसे में जब महिला सिंदूर लगाकर सूर्य की आराधना करती है, तो यह उसके सुहाग की स्थिरता और पारिवारिक शक्ति का प्रतीक बन जाता है। कहा जाता है कि सूर्य की किरणें जब सिंदूर से सजे माथे पर पड़ती हैं, तो यह शरीर में सकारात्मक ऊर्जा भर देती हैं और मन में शक्ति और संतुलन बनाए रखती हैं।

सिंदूर का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व

सिंदूर लगाने की परंपरा सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि वैज्ञानिक रूप से भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। आयुर्वेद के अनुसार, सिंदूर में पाए जाने वाले तत्व मस्तिष्क की नसों पर शांत प्रभाव डालते हैं। इससे तनाव कम होता है और मन में शांति बनी रहती है। मांग से नाक तक सिंदूर लगाने से शरीर के उस हिस्से में ऊर्जा का प्रवाह होता है, जो हृदय और मानसिक स्थिरता से जुड़ा है।

 

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Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
मुझे लगता है कि कलम में बहुत ताकत होती है और खबरें हमेशा सच सामने लाती हैं। इसी सच्चाई को सीखने और समझने के लिए मैं रोज़ाना पत्रकारिता के नए पहलुओं को सीखती हूँ। View all posts by Bhawna Choubey
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