
देवउठनी एकादशी (Dev Uthani Ekadashi 2025) हिंदू धर्म का एक अत्यंत शुभ पर्व है, जो चार महीने की चातुर्मास अवधि के बाद मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागकर फिर से सृष्टि के कार्यों का संचालन शुरू करते हैं। इसीलिए इसे प्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है। कहते हैं, अगर इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक दीपदान किया जाए, तो रुके हुए कार्य पूरे होते हैं, विवाह योग बनता है, और घर में लक्ष्मी का स्थायी वास होता है।
हर साल की तरह 2025 में भी यह पर्व पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, देवउठनी एकादशी 2025 में दीपक जलाकर किए गए ये दुर्लभ उपाय न केवल आपके संकटों को दूर करेंगे, बल्कि अद्भुत सौभाग्य के द्वार भी खोल देंगे।
क्यों मनाई जाती है देवउठनी एकादशी?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान विष्णु चार महीने के लिए क्षीर सागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं, तब उस अवधि को चातुर्मास कहा जाता है। इस दौरान विवाह, मांगलिक कार्य और नए आरंभ वर्जित माने जाते हैं। लेकिन जब देवउठनी एकादशी आती है, तो विष्णुजी के जागने के साथ ही सभी शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाती है। इसी दिन से विवाह, गृह प्रवेश, व्रत-उत्सव आदि कार्यों का शुभ मुहूर्त भी आरंभ होता है।
देवउठनी एकादशी पर दीपक का महत्व
हिंदू धर्म में दीपक न केवल प्रकाश का प्रतीक है, बल्कि यह सकारात्मक ऊर्जा और दिव्यता का माध्यम भी है। देवउठनी एकादशी पर दीपक जलाने से विष्णुजी और लक्ष्मीजी दोनों प्रसन्न होते हैं, क्योंकि इस दिन लक्ष्मीजी भगवान विष्णु के साथ जागृत होती हैं। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन दीपक जलाने से, जीवन के अंधकार मिटते हैं। घर में धन-संपत्ति की वृद्धि होती है। नकारात्मक शक्तियाँ दूर भागती हैं। भाग्य के बंद दरवाजे खुल जाते हैं
देवउठनी एकादशी 2025 पर दीपक से जुड़े दुर्लभ और चमत्कारी उपाय
तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाना
देवउठनी एकादशी की शाम को तुलसी माता के पास घी के 5 दीपक जलाना बहुत शुभ माना जाता है। तुलसी को हरिप्रिया और मां लक्ष्मी का स्वरूप कहा गया है। जब हम उनके सामने दीपक जलाते हैं, तो हमारे विवाहिक जीवन की परेशानियाँ दूर होती हैं, घर में प्यार और सौहार्द बढ़ता है। साथ ही धन की देवी लक्ष्मी का आशीर्वाद भी मिलता है, जिससे घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
मुख्य द्वार पर दीपक जलाना
देवउठनी एकादशी की रात को घर के मुख्य दरवाजे के दोनों ओर गाय के घी के दीपक जलाना बेहद शुभ होता है। ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा प्रवेश करती है और नकारात्मक शक्तियाँ दूर हो जाती हैं। इस उपाय से घर में सुख, शांति और सौभाग्य का वास होता है। यह दीपक न केवल घर को रोशन करते हैं बल्कि भाग्य के दरवाजे भी खोलते हैं।
पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाना
इस पवित्र रात पीपल के पेड़ के नीचे एक दीपक जलाकर सात बार उसकी परिक्रमा करनी चाहिए। यह उपाय कर्ज से मुक्ति दिलाने में अत्यंत प्रभावी माना जाता है। साथ ही, इससे धन आगमन के योग भी बनते हैं। मान्यता है कि पीपल में भगवान विष्णु का वास होता है, इसलिए यहां दीपक जलाने से पापों का नाश होता है और जीवन में समृद्धि आती है।
रसोई घर में दीपक जलाना
देवउठनी एकादशी पर रसोई में दीपक जलाना भी बहुत शुभ माना गया है। रसोई को मां अन्नपूर्णा का स्थान कहा जाता है, जो अन्न और समृद्धि की देवी हैं। यहां दीपक जलाने से घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती, और परिवार हमेशा धन-धान्य से भरा रहता है। यह उपाय घर में स्वास्थ्य, सुख और सम्पन्नता बनाए रखने में मदद करता है।
जल स्रोत के पास दीपक प्रवाहित करने का उपाय
देवउठनी एकादशी की रात नदी, तालाब या किसी जल स्रोत में दीपक प्रवाहित करना बहुत ही शुभ माना गया है। यह उपाय रुके हुए कामों को पूरा करने और जीवन के संकटों से मुक्ति दिलाने में सहायक होता है। जब दीपक जल में प्रवाहित किया जाता है, तो वह अंधकार को मिटाकर नई ऊर्जा और सकारात्मकता लाता है। ऐसा करने से भाग्य की रुकावटें दूर होती हैं, और व्यक्ति के जीवन में सफलता और शांति का प्रकाश फैलता है।
देवउठनी एकादशी और तुलसी विवाह का संबंध
देवउठनी एकादशी के अगले दिन तुलसी विवाह का पर्व मनाया जाता है। यह भगवान विष्णु और तुलसी माता का दिव्य विवाह माना जाता है। इस दिन तुलसी के पौधे को सजाकर, मंगल गीत गाते हुए उनका विवाह संपन्न किया जाता है। मान्यता है कि जो व्यक्ति देवउठनी एकादशी पर दीपदान करता है और अगले दिन तुलसी विवाह करता है, उसके जीवन में सौभाग्य स्थायी रूप से बस जाता है।
देवउठनी एकादशी पर क्या करें और क्या न करें
क्या करें
- सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और व्रत संकल्प लें।
- विष्णुजी और लक्ष्मीजी की पूजा में तुलसी पत्र, पीले पुष्प, और पंचामृत का उपयोग करें।
- दीपक जलाकर विष्णु सहस्रनाम या गीता के श्लोकों का पाठ करें।
- जरूरतमंदों को भोजन और दान दें।
क्या न करें
- इस दिन मांसाहार, मदिरा या झूठ बोलना वर्जित है।
- किसी का अपमान न करें।
- बिना पूजा के भोजन न करें।
देवउठनी एकादशी 2025 का ज्योतिषीय महत्व
देवउठनी एकादशी 2025 में चंद्रमा मेष राशि में रहेगा और अश्विनी नक्षत्र का प्रभाव रहेगा। यह संयोजन उन्नति, नए कार्यों की शुरुआत और जीवन में स्थिरता के लिए अत्यंत शुभ है। इस दिन किए गए दीपक उपाय ग्रह दोषों और कुंडली के नकारात्मक योगों को भी शांत करते हैं।

