
Dhanteras 2026 Yam Deepdan: धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा के साथ यमराज के नाम पर दीपक जलाने की भी परंपरा है। इसे यम दीपदान कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस की शाम घर के बाहर दक्षिण दिशा में दीपक जलाकर परिवार की लंबी आयु और अकाल मृत्यु से रक्षा की प्रार्थना की जाती है। दीपावली पर घरों को रोशन करने के लिए जलाए जाने वाले दीपकों से अलग यम दीप का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। इसके पीछे एक पौराणिक कथा भी प्रचलित है।
धनतेरस पर क्यों जलाया जाता है यम का दीपक?
हिंदू धर्म में यमराज को मृत्यु और न्याय का देवता माना गया है। धनतेरस की शाम उनके नाम पर दीपक जलाने की परंपरा को जीवन की रक्षा और लंबी आयु की कामना से जोड़ा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन यम दीपदान करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। हालांकि, यह आस्था से जुड़ी मान्यता है, जिसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा अच्छे स्वास्थ्य के लिए की जाती है, जबकि यम दीपदान के माध्यम से परिवार के सदस्यों की दीर्घायु की कामना की जाती है। यही कारण है कि कई परिवारों में धनतेरस की शाम मुख्य द्वार के बाहर विशेष दीपक जलाने की परंपरा आज भी निभाई जाती है।
यम दीपदान से जुड़ी राजा हेम के पुत्र की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, राजा हेम के पुत्र की विवाह के चौथे दिन मृत्यु होने की भविष्यवाणी हुई थी। राजकुमार का विवाह होने के बाद उसकी पत्नी को इस भविष्यवाणी का पता चला। उसने अपने पति की रक्षा के लिए पूरी रात जागने का निर्णय लिया।
कथा में बताया जाता है कि राजकुमार की पत्नी ने घर के बाहर अनेक दीपक जलाए और सोने-चांदी के आभूषण रख दिए। जब यमदूत राजकुमार के प्राण लेने पहुंचे तो दीपकों और आभूषणों की तेज चमक के कारण वे अपना काम नहीं कर सके। इसी कथा से धनतेरस की रात दीपक जलाने और अकाल मृत्यु से रक्षा की प्रार्थना करने की परंपरा को जोड़ा जाता है।
धनतेरस पर यम दीप कैसे जलाएं?
यम दीपदान के लिए आमतौर पर मिट्टी या आटे का चार मुख वाला दीपक इस्तेमाल किया जाता है। इसमें चार बत्तियां लगाकर सरसों का तेल या पारिवारिक परंपरा के अनुसार अन्य तेल डाला जाता है। धनतेरस की शाम प्रदोष काल में दीपक जलाकर घर के मुख्य द्वार के बाहर रखा जाता है।
यम दीप को दक्षिण दिशा की ओर रखने की परंपरा है, क्योंकि हिंदू धार्मिक मान्यताओं में दक्षिण दिशा को यमराज से जोड़ा गया है। दीपक जलाते समय परिवार के सदस्यों की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और अकाल मृत्यु से रक्षा की प्रार्थना की जाती है।
कुछ परिवारों में एक ही दीपक जलाया जाता है, जबकि कई स्थानों पर चार बत्तियों वाला दीपक रखने की परंपरा है। दीपदान की विधि अलग-अलग क्षेत्रों में बदल सकती है।
यम दीपदान के समय कौन सा मंत्र बोलें?
धनतेरस पर यम दीप जलाते समय इस मंत्र का जाप किया जा सकता है।
मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन श्यामया सह।
त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यजः प्रीयतां मम॥
इस मंत्र के माध्यम से भगवान यमराज से दीपदान स्वीकार करने और प्रसन्न होने की प्रार्थना की जाती है। सूर्यपुत्र होने के कारण मंत्र में यमराज को ‘सूर्यजः’ कहा गया है।
धनतेरस पर यम दीपदान कब करें?
यम दीपदान धनतेरस की शाम प्रदोष काल में करने की परंपरा है। शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को धनतेरस के अवसर पर सूर्यास्त के बाद यम दीप जलाया जा सकता है। पूजा और दीपदान का स्थानीय समय शहर के अनुसार अलग हो सकता है, इसलिए अपने क्षेत्र के पंचांग के अनुसार प्रदोष काल का समय देखना उचित रहेगा।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक कथाओं और प्रचलित परंपराओं पर आधारित है। पूजा विधि और रीति-रिवाज क्षेत्र एवं पारिवारिक परंपराओं के अनुसार अलग हो सकते हैं। यम दीपदान से अकाल मृत्यु टलने जैसी मान्यताओं का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
10 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव, डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में.

