त्योहारों से जुड़ी एक पुरानी सामाजिक परंपरा पर विराम लगाते हुए ग्राम पंचायत खेरी में एक अहम फैसला लिया गया है। चंद्रवंशी खाती समाज ने होली के अवसर पर उपहार स्वरूप बर्तन देने की वर्षों पुरानी ‘बर्तन प्रथा’ को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की घोषणा की है। इस निर्णय का उल्लंघन करने वाले पर 5000 रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया जाएगा।
यह निर्णय समाज के वरिष्ठजनों और स्थानीय प्रतिनिधियों की एक बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया। बैठक में इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की गई कि समय के साथ यह परंपरा सामाजिक दिखावे और प्रतिस्पर्धा का रूप ले चुकी थी।
क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?
समाज के प्रतिनिधियों के अनुसार, होली जैसे त्योहारों पर विवाहित बेटियों और रिश्तेदारों को कपड़े-मिठाई के साथ धातु के बर्तन देने की यह परंपरा धीरे-धीरे एक अनिवार्य सामाजिक दबाव बन गई थी। इससे विशेष रूप से मध्यम और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ रहा था। कई परिवार अपनी क्षमता से बढ़कर खर्च करने के लिए मजबूर हो रहे थे, जिससे त्योहार की खुशी कम और तनाव अधिक हो रहा था।
इस प्रथा से जुड़ी बढ़ती प्रतिस्पर्धा को खत्म करने और फिजूलखर्ची पर रोक लगाने के उद्देश्य से ही इसे पूरी तरह बंद करने का निर्णय लिया गया।
सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित, जुर्माने की राशि का होगा सदुपयोग
बैठक में यह भी तय किया गया कि समाज का कोई भी व्यक्ति यदि इस सामूहिक निर्णय का उल्लंघन करता है तो उस पर जुर्माना लगाया जाएगा। इस जुर्माने से प्राप्त होने वाली राशि को व्यर्थ नहीं जाने दिया जाएगा, बल्कि इसका उपयोग सामूहिक सामाजिक कार्यों और समुदाय के उत्थान के लिए किया जाएगा।
स्थानीय स्तर पर इस फैसले को एक सकारात्मक और प्रगतिशील कदम के रूप में देखा जा रहा है। समाज के पदाधिकारियों का मानना है कि इस तरह के सुधारों से न केवल अनावश्यक खर्च पर अंकुश लगेगा, बल्कि सामाजिक समानता को भी बढ़ावा मिलेगा। सदस्यों ने इस बात पर जोर दिया कि त्योहारों का मूल उद्देश्य सादगी, प्रेम और सामूहिक खुशी है, जिसे दिखावे की परंपराओं से मुक्त होकर मनाया जाना चाहिए।





