सनातन धर्म में हर तिथि का अपना अलग महत्व माना गया है, लेकिन कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को विशेष रूप से भगवान शिव के रौद्र स्वरूप काल भैरव को समर्पित माना जाता है। इस दिन को कालाष्टमी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार काल भैरव को समय के स्वामी और नकारात्मक शक्तियों का नाश करने वाला देवता माना जाता है।

कई लोगों को ऐसा महसूस होता है कि उनके जीवन में अचानक समस्याएं बढ़ने लगी हैं। घर में बिना कारण कलह होना, काम बनते-बनते बिगड़ जाना या लगातार सेहत से जुड़ी परेशानियां होना अक्सर नजर दोष या नकारात्मक ऊर्जा से जोड़ा जाता है। ऐसे में कालाष्टमी का दिन इन परेशानियों से मुक्ति पाने के लिए बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए कुछ आसान उपाय व्यक्ति और उसके परिवार को नकारात्मक प्रभावों से बचा सकते हैं।

कालाष्टमी और काल भैरव पूजा का धार्मिक महत्व

कालाष्टमी का संबंध भगवान शिव के रौद्र अवतार काल भैरव से जुड़ा हुआ है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार काल भैरव को काशी का कोतवाल कहा जाता है और वे धर्म की रक्षा करने वाले देवता माने जाते हैं। काल भैरव की पूजा करने से भय, संकट और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होने की मान्यता है।

धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि काल भैरव केवल दुष्ट शक्तियों का नाश ही नहीं करते बल्कि अपने भक्तों की रक्षा भी करते हैं। यही कारण है कि कालाष्टमी के दिन काल भैरव की विशेष पूजा करने की परंपरा रही है। इस दिन मंदिरों में विशेष पूजन, दीप प्रज्वलन और मंत्र जाप किया जाता है।

कहा जाता है कि अगर किसी व्यक्ति को नजर दोष, तंत्र-बाधा या किसी तरह की नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव महसूस हो रहा हो तो कालाष्टमी के दिन काल भैरव की पूजा करना बेहद फलदायी माना जाता है।

नजर दोष से बचने के लिए काले धागे का उपाय

कालाष्टमी के दिन किया जाने वाला काले धागे का उपाय काफी प्रभावी माना जाता है। इस उपाय को करने के लिए व्यक्ति को काल भैरव के मंदिर जाकर पूजा करनी चाहिए।

सबसे पहले भगवान काल भैरव के चरणों में सिंदूर अर्पित करें। इसके बाद उसी सिंदूर को एक काले धागे पर लगाएं। अब इस धागे को धारण करते समय “ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं” मंत्र का जाप करें।

धार्मिक मान्यता के अनुसार इस धागे को गले में या दाहिने हाथ की कलाई पर बांधने से यह एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। कहा जाता है कि इससे नजर दोष और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा होती है।

चौमुखी दीपक और काजल का विशेष उपाय

कालाष्टमी के दिन शाम के समय एक और खास उपाय करने की परंपरा है। इस दिन घर के मुख्य द्वार पर सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाना शुभ माना जाता है। दीपक की लौ से बनने वाली काजल को बेहद प्रभावी माना जाता है। इस काजल का छोटा सा टीका बच्चों और परिवार के सदस्यों के कान के पीछे लगाया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से बुरी नजर का प्रभाव समाप्त हो जाता है।

इसके साथ ही कालाष्टमी के दिन “ॐ कालभैरवाय नमः” मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। मंत्र जाप के समय भगवान काल भैरव के सामने दीपक जलाकर सुरक्षा और सुख-शांति की प्रार्थना की जाती है।

कालाष्टमी पर इन नियमों का पालन करना भी जरूरी

कालाष्टमी का व्रत और पूजा करते समय कुछ नियमों का पालन करना भी जरूरी माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन तामसिक भोजन यानी मांस और मदिरा का सेवन पूरी तरह से नहीं करना चाहिए।

इसके अलावा इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना और मन को शांत रखना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। पूजा के समय भगवान काल भैरव से अपने परिवार की सुरक्षा और सुख-समृद्धि की प्रार्थना की जाती है। कहा जाता है कि कालाष्टमी के दिन किए गए छोटे-छोटे धार्मिक कार्य भी व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।

काले कुत्ते को भोजन कराने का महत्व

काल भैरव का वाहन कुत्ता माना जाता है। इसलिए कालाष्टमी के दिन कुत्तों को भोजन कराना बेहद शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन काले कुत्ते को गुड़ या मीठी रोटी खिलाने से शनि और राहु से जुड़े दोष कम होते हैं। कई लोग इस दिन कुत्तों को दूध और रोटी भी खिलाते हैं। ऐसा माना जाता है कि यह छोटा सा उपाय व्यक्ति के जीवन में आने वाली बाधाओं को कम करने में सहायक होता है।

दान-पुण्य से मिलती है विशेष कृपा

कालाष्टमी के दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन जरूरतमंद और गरीब लोगों की मदद करना बेहद शुभ माना जाता है। अन्न, वस्त्र या अन्य जरूरी वस्तुओं का दान करने से काल भैरव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। धार्मिक मान्यता है कि इससे व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। दान करते समय मन में सेवा भाव होना चाहिए, तभी इसका पूरा फल प्राप्त होता है।

कब है चैत्र महीने की कालाष्टमी

दृक पंचांग के अनुसार इस साल चैत्र कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 10 मार्च को रात 1 बजकर 54 मिनट से शुरू होगी। यह तिथि 12 मार्च को सुबह 4 बजकर 19 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में चैत्र महीने की कालाष्टमी का व्रत 11 मार्च 2026 को रखा जाएगा। इसी दिन काल भैरव की पूजा, व्रत और दान-पुण्य करना शुभ माना गया है। इस दिन मंदिरों में विशेष पूजा और भैरव आरती का आयोजन भी किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।

Disclaimer- यहां दी गई सूचना सामान्य जानकारी के आधार पर बताई गई है। इनके सत्य और सटीक होने का दावा MP Breaking News न्यूज़ नहीं करता।