माघ महीने की गुप्त नवरात्रि में देवी कवच का नियमित पाठ साधक के जीवन में सुरक्षा कवच बनता है। 9 दिन की यह साधना भय, रोग, कर्ज, तनाव और बाधाओं से मुक्ति दिलाने वाली मानी जाती है।
हिंदू धर्म में नवरात्रि केवल पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और शक्ति साधना का समय मानी जाती है। जब बात गुप्त नवरात्रि की आती है, तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। यह वह समय होता है, जब साधक बाहरी दिखावे से दूर रहकर भीतर की शक्ति को जाग्रत करता है। माघ महीने की गुप्त नवरात्रि साधना, तंत्र और देवी उपासना के लिए बेहद खास मानी जाती है।
इस साल माघी गुप्त नवरात्रि 19 जनवरी 2026 से शुरू होकर 27 जनवरी 2026 तक चलेगी। इन 9 दिनों में देवी कवच का पाठ करने से साधक को विशेष रक्षा, मानसिक शांति और जीवन की बड़ी समस्याओं से मुक्ति मिलती है। शास्त्रों में देवी कवच को मां दुर्गा की सुरक्षा शक्ति का प्रतीक माना गया है।
माघी गुप्त नवरात्रि 2026: तिथि और महत्व
माघ माह की गुप्त नवरात्रि हर साल शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक मनाई जाती है। वर्ष 2026 में यह पर्व 19 जनवरी से आरंभ होगा और 27 जनवरी को नवमी तिथि के साथ समाप्त होगा। गुप्त नवरात्रि को “गुप्त” इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस दौरान साधक अपनी साधना को सार्वजनिक न करके एकांत में करता है। जहां चैत्र और शारदीय नवरात्रि में सार्वजनिक पूजा होती है, वहीं गुप्त नवरात्रि में तंत्र साधना, दस महाविद्याओं की पूजा और विशेष पाठ किए जाते हैं। यह समय विशेष रूप से उन लोगों के लिए अहम होता है, जो लंबे समय से जीवन में बाधाओं, डर, रोग या मानसिक तनाव से जूझ रहे होते हैं।
देवी कवच क्या है और इसका धार्मिक महत्व
देवी कवच एक शक्तिशाली स्तोत्र है, जो मां दुर्गा की कृपा और सुरक्षा प्रदान करता है। इसे दुर्गा सप्तशती का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार देवी कवच का पाठ करने से साधक चारों दिशाओं से मां दुर्गा की रक्षा में आ जाता है। देवी कवच को कवच इसलिए कहा गया है क्योंकि यह पाठ साधक के चारों ओर एक अदृश्य सुरक्षा घेरा बना देता है। यह नकारात्मक ऊर्जा, भय, शत्रु बाधा और मानसिक अशांति से रक्षा करता है। गुप्त नवरात्रि में इसका पाठ विशेष फलदायी माना जाता है, क्योंकि इस समय की गई साधना जल्दी फल देती है।





