महाशिवरात्रि का पर्व हर साल बड़े श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का प्रतीक माना जाता है। इस दिन देशभर में मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है और लोग व्रत रखकर शिव जी की पूजा-अर्चना करते हैं।
माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव अपने भक्तों की मनोकामनाएं जल्दी सुनते हैं। इसलिए लोग अपने जीवन की परेशानियों से मुक्ति पाने के लिए पूजा, अभिषेक और दान-पुण्य करते हैं। खासकर वे लोग जो शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या से परेशान होते हैं, वे इस दिन विशेष उपाय करते हैं।
शनि के प्रभाव से क्यों डरते हैं लोग
ज्योतिष शास्त्र में शनि ग्रह को कर्मों का फल देने वाला ग्रह कहा जाता है। जब किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि की स्थिति कमजोर होती है या साढ़ेसाती और ढैय्या का समय चलता है, तो जीवन में परेशानियां बढ़ सकती हैं।
ऐसे समय में नौकरी में दिक्कत, आर्थिक तनाव, मानसिक बेचैनी, परिवार में विवाद या स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं सामने आ सकती हैं। इसी कारण लोग शनि देव को शांत करने के उपाय खोजते हैं।
महाशिवरात्रि का दिन ऐसे उपायों के लिए बहुत शुभ माना जाता है, क्योंकि भगवान शिव को शनि देव का गुरु भी कहा जाता है। इसलिए इस दिन किए गए दान और पूजा का विशेष फल मिलता है।
महाशिवरात्रि पर दान का महत्व क्या है
धार्मिक मान्यता है कि महाशिवरात्रि पर पूजा के साथ दान करने से पुण्य मिलता है और ग्रह दोषों का प्रभाव कम होता है। जरूरतमंदों की मदद करने से न केवल धार्मिक लाभ मिलता है, बल्कि मन को भी शांति मिलती है। शनि से संबंधित वस्तुओं का दान इस दिन विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इससे शनि की नकारात्मकता कम होती है और जीवन में स्थिरता आती है। दान करते समय यह भी ध्यान रखना चाहिए कि वस्तु जरूरतमंद को ही दी जाए, ताकि उसका सही उपयोग हो सके।
महाशिवरात्रि पर लोहे का दान क्यों माना जाता है शुभ
ज्योतिष के अनुसार लोहा शनि ग्रह से जुड़ी धातु मानी जाती है। इसलिए महाशिवरात्रि के दिन लोहे या लोहे से बनी वस्तु का दान करना शुभ फलदायक माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इससे शनि के बुरे प्रभाव कम होते हैं और जीवन में स्थिरता आती है। कई लोग इस दिन लोहे के बर्तन या अन्य उपयोगी वस्तुएं जरूरतमंद लोगों को दान करते हैं। दान का उद्देश्य सिर्फ ग्रह दोष से मुक्ति नहीं बल्कि किसी की मदद करना भी होना चाहिए।
सरसों के तेल का दान क्यों किया जाता है
सरसों का तेल भी शनि देव से जुड़ा माना जाता है। महाशिवरात्रि के दिन लोहे के पात्र में सरसों का तेल रखकर दान करने की परंपरा है। कुछ लोग मंदिर में तेल दान करते हैं तो कुछ जरूरतमंद व्यक्ति को देते हैं। मान्यता है कि इससे साढ़ेसाती और ढैय्या के दुष्प्रभाव कम हो सकते हैं। तेल दान करते समय भगवान शिव का स्मरण करने और सकारात्मक सोच रखने की सलाह दी जाती है।
काले तिल का दान भी देता है राहत
महाशिवरात्रि पर काले तिल का दान भी शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार काले तिल का संबंध शनि और पितृ दोष से जोड़ा जाता है। काले तिल का दान करने से जीवन की बाधाएं कम होती हैं और मानसिक शांति मिलती है। कई लोग पूजा के बाद काले तिल का दान करते हैं या गरीबों को भोजन के साथ देते हैं। इससे व्यक्ति के करियर और जीवन में भी सकारात्मक प्रभाव पड़ने की मान्यता है।
काले वस्त्र दान करने का महत्व
काले रंग को भी शनि देव से जोड़ा जाता है। इसलिए इस दिन काले कपड़ों का दान शुभ माना जाता है। जरूरतमंद लोगों को कपड़े दान करने से पुण्य मिलता है और शनि की नकारात्मक ऊर्जा कम होती है, ऐसा धार्मिक विश्वास है। साथ ही यह दान सामाजिक दृष्टि से भी बहुत उपयोगी होता है क्योंकि जरूरतमंद लोगों को मदद मिलती है।
छाता दान करने की परंपरा का कारण
महाशिवरात्रि के दिन छाता दान करने की भी परंपरा है। माना जाता है कि छाता सुरक्षा और संरक्षण का प्रतीक है। धार्मिक मान्यता है कि इससे जीवन में मानसिक शांति आती है और परेशानियों से राहत मिलती है। खासकर गरीब और जरूरतमंद लोगों को छाता दान करना उपयोगी माना जाता है।
दान के साथ जरूरी है सही सोच और आचरण
सिर्फ दान करने से ही जीवन की सारी समस्याएं खत्म नहीं होतीं। जरूरी है कि व्यक्ति अपने व्यवहार, सोच और कर्मों को भी सही रखे। भगवान शिव की पूजा के साथ सत्य, मेहनत और ईमानदारी को जीवन में अपनाना भी उतना ही जरूरी है। तभी ग्रहों के प्रभाव भी सकारात्मक होने लगते हैं।
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